सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पत्नी को 'बेवकूफ' या 'निक्कमी' कहना क्रूरता या आपराधिक धमकी नहीं है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पत्नी को 'बेवकूफ' या 'निक्कमी' कहना क्रूरता या आपराधिक धमकी नहीं है।
- पत्नी को 'बेवकूफ' कहना क्रूरता नहीं: सुप्रीम कोर्ट।
- टोरंटो आत्महत्या मामले में पति पर दहेज हत्या खारिज।
पत्नी को 'बेवकूफ' कहना क्रूरता नहीं: सुप्रीम कोर्ट।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
टोरंटो आत्महत्या मामले में पति पर दहेज हत्या खारिज।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दंपती के बीच के आपसी मतभेदों और तल्खियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस बी.वी
नागरत्ना और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने टोरंटो (कनाडा) में बहुमंजिला इमारत से कूदकर आत्महत्या करने वाली महिला के मामले में उसके पति के खिलाफ चल रहे दहेज हत्या के मामले को खारिज कर दिया।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पत्नी को 'बेवकूफ' या 'निक्कमी' कहना किसी भी सूरत में क्रूरता या आपराधिक धमकी की श्रेणी में नहीं आता है। यह मामला तीन जनवरी 2021 को हुई शादी से जुड़ा है, जिसके बाद दंपती फरवरी 2022 में टोरंटो रहने चले गए थे। 11 जून 2023 को महिला ने 22वीं मंजिल पर स्थित अपने अपार्टमेंट से कूदकर जान दे दी थी।
मौके से मिले हाथ से लिखे सुसाइड नोट में महिला ने लिखा था कि वह एक साल से अधिक समय से नौकरी न मिलने के कारण खुद को जीवन में असफल मानती थी। इसके बावजूद उसके पिता ने औरंगाबाद के सतारा थाने में उसके पति और परिवार के खिलाफ दहेज हत्या, क्रूरता और आपराधिक धमकी का मामला दर्ज कराया था।
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई भी ठोस सबूत पेश करने में पूरी तरह असफल रहा जो यह साबित कर सके कि पति या उसके परिवार ने दहेज की कोई मांग की थी या उस मांग का पत्नी की आत्महत्या से कोई सीधा संबंध था। कोर्ट ने कहा कि धारा 304बी (दहेज हत्या) के तहत आरोप सिद्ध करने के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि मौत से ठीक पहले महिला को दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पति का गुस्सा होना या छोटी-छोटी बातों पर डांटना पति-पत्नी के बीच के स्वभावगत मतभेद (टेम्परामेंटल इश्यू) को दर्शाता है, जिसे आपराधिक धमकी या क्रूरता नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि हम दुखी परिवार के दर्द और पीड़ा को पूरी तरह समझते हैं, लेकिन बिना किसी पुख्ता और ठोस सबूत के सिर्फ सामान्य आरोपों के आधार पर पति या ससुराल वालों को क्रूरता के इस दलदल में घसीटना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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