लेखिका सुबी ताबा ने सियांग जलविद्युत परियोजना को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत की सामरिक और ऊर्जा संबंधी जरूरतें महत्वपूर्ण हैं।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- लेखिका सुबी ताबा ने सियांग जलविद्युत परियोजना को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत की सामरिक और ऊर्जा संबंधी जरूरतें महत्वपूर्ण हैं।
- सुबी ताबा ने आदिवासी अधिकारों के सम्मान की मांग की (फोटो- सोशल मीडिया)
- डिजिटल डेस्क, गंगटोक। कई पुरस्कार विजेता लेखिका सुबी ताबा ने अरुणाचल प्रदेश के सियांग क्षेत्र में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
सुबी ताबा ने आदिवासी अधिकारों के सम्मान की मांग की (फोटो- सोशल मीडिया)
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
डिजिटल डेस्क, गंगटोक। कई पुरस्कार विजेता लेखिका सुबी ताबा ने अरुणाचल प्रदेश के सियांग क्षेत्र में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि भारत की सामरिक और ऊर्जा संबंधी जरूरतें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके लिए आदिवासी समुदायों की पुश्तैनी जमीन, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान की अनदेखी नहीं की जा सकती।
विकास परियोजनाओं से प्रभावित लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना और उनके साथ सार्थक बातचीत करना जरूरी है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
हाल ही में राजधानी गंगटोक में संपन्न तीन दिवसीय सिक्किम आर्ट एंड लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान बातचीत में ताबा ने कहा कि सरकार की अपनी सामरिक और विकास संबंधी जरूरतें हो सकती हैं।
खासकर यारलुंग त्सांगपो नदी के ऊपरी हिस्से में चीन की प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना को देखते हुए भारत के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। हालांकि, इन जरूरतों को पूरा करने के लिए उन लोगों की अनदेखी नहीं की जा सकती, जो पीढ़ियों से इन जमीनों पर रहते आए हैं।
रामनाथ गोयनका साहित्य सम्मान से सम्मानित ताबा अरुणाचल प्रदेश में न्यीशी आदिवासी समुदाय से आती हैं। उन्होंने कहा कि सियांग घाटी में परियोजना का विरोध कर रहे लोग अपने घर, पुश्तैनी जमीन, आजीविका, पर्यावरण और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनकी चिंताएं पूरी तरह जायज हैं। वह 100 इंस्पायरिंग आउथर्स आफ इंडिया सम्मान से भी सम्मानित हो चुकी हैं।
अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना को देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक माना जाता है। हालांकि, आदिवासी समुदाय के एक वर्ग, विशेषकर आदि समुदाय के लोगों की ओर से इसका लगातार विरोध किया जा रहा है।
लोगों को आशंका है कि परियोजना से गांव जलमग्न हो सकते हैं, कृषि भूमि का नुकसान होगा और पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित होगी। क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।