LIVE सोम, 2 नव॰ 2026
ई-पेपर
सत्यमेव जयते • The Voice of Independent Journalism • 24x7 Digital Media
TAAZAWIRE
ताज़ा वायर • राष्ट्रीय डिजिटल दैनिक
सोमवार, 2 नवंबर 2026 • विक्रम संवत 2083 | राष्ट्रीय दैनिक
ताज़ा हलचल:
मार्केट लाइव:
सेंसेक्स (BSE) 75,692.78 +1233.25 (+1.66%)
निफ्टी 50 23,440.8 +387.70 (+1.68%)
सोना (24K) ₹78,850 +240
चांदी (1kg) ₹93,400/kg +450
पेट्रोल (दिल्ली) ₹94.72/L
डीजल ₹87.62/L
USD/INR ₹94.89
विशेष पेशकश (SPONSORED) SPONSORED
Dukan Book Digital Khata - Google Play Store
sarkari-yojna तथ्य सत्यापित (Fact Checked) 2 मिनट का समय 1 बार पढ़ा गया
भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन की कीमत पर न हो विकास, सियांग जलविद्युत परियोजना पर सुबी ताबा ने जताई चिंता

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: सोम, 2 नव॰ 2026, 03:35 pm
समाचार एजेंसी Dainik Jagran
यह ख़बर सुनें (AI ऑडियो) ऑडियो

प्ले बटन दबाकर पूरी ख़बर आवाज़ में सुनें

आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन की कीमत पर न हो विकास, सियांग जलविद्युत परियोजना पर सुबी ताबा ने जताई चिंता
इस ख़बर को शेयर करें: दोस्तों के साथ साझा करें
WhatsApp Telegram X (Twitter)
विशेष पेशकश (SPONSORED) SPONSORED
Dukan Book Digital Khata - Google Play Store

लेखिका सुबी ताबा ने सियांग जलविद्युत परियोजना को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत की सामरिक और ऊर्जा संबंधी जरूरतें महत्वपूर्ण हैं।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • लेखिका सुबी ताबा ने सियांग जलविद्युत परियोजना को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत की सामरिक और ऊर्जा संबंधी जरूरतें महत्वपूर्ण हैं।
  • सुबी ताबा ने आदिवासी अधिकारों के सम्मान की मांग की (फोटो- सोशल मीडिया)
  • डिजिटल डेस्क, गंगटोक। कई पुरस्कार विजेता लेखिका सुबी ताबा ने अरुणाचल प्रदेश के सियांग क्षेत्र में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।

सुबी ताबा ने आदिवासी अधिकारों के सम्मान की मांग की (फोटो- सोशल मीडिया)

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

डिजिटल डेस्क, गंगटोक। कई पुरस्कार विजेता लेखिका सुबी ताबा ने अरुणाचल प्रदेश के सियांग क्षेत्र में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना को लेकर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि भारत की सामरिक और ऊर्जा संबंधी जरूरतें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके लिए आदिवासी समुदायों की पुश्तैनी जमीन, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान की अनदेखी नहीं की जा सकती।

विकास परियोजनाओं से प्रभावित लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना और उनके साथ सार्थक बातचीत करना जरूरी है।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

हाल ही में राजधानी गंगटोक में संपन्न तीन दिवसीय सिक्किम आर्ट एंड लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान बातचीत में ताबा ने कहा कि सरकार की अपनी सामरिक और विकास संबंधी जरूरतें हो सकती हैं।

खासकर यारलुंग त्सांगपो नदी के ऊपरी हिस्से में चीन की प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना को देखते हुए भारत के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। हालांकि, इन जरूरतों को पूरा करने के लिए उन लोगों की अनदेखी नहीं की जा सकती, जो पीढ़ियों से इन जमीनों पर रहते आए हैं।

रामनाथ गोयनका साहित्य सम्मान से सम्मानित ताबा अरुणाचल प्रदेश में न्यीशी आदिवासी समुदाय से आती हैं। उन्होंने कहा कि सियांग घाटी में परियोजना का विरोध कर रहे लोग अपने घर, पुश्तैनी जमीन, आजीविका, पर्यावरण और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनकी चिंताएं पूरी तरह जायज हैं। वह 100 इंस्पायरिंग आउथर्स आफ इंडिया सम्मान से भी सम्मानित हो चुकी हैं।

अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना को देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक माना जाता है। हालांकि, आदिवासी समुदाय के एक वर्ग, विशेषकर आदि समुदाय के लोगों की ओर से इसका लगातार विरोध किया जा रहा है।

लोगों को आशंका है कि परियोजना से गांव जलमग्न हो सकते हैं, कृषि भूमि का नुकसान होगा और पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित होगी। क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

रिपोर्टिंग स्रोत: Dainik Jagran मूल रिपोर्ट देखें

💬 इस ख़बर पर आपकी क्या राय है?

अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करें (1-क्लिक वोट)

यह जानकारी कैसी लगी? अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें:

इस ख़बर को शेयर करें: दोस्तों के साथ साझा करें
WhatsApp Telegram X (Twitter)

📢 ऐसी ही हर बड़ी ताज़ा ख़बर सीधे टेलीग्राम पर पाएं

बिना किसी देरी के सबसे पहले अपडेट्स के लिए हमारे ग्रुप से जुड़ें।

चैनल जॉइन करें
TaazaWire App Icon

TaazaWire App FREE

1-क्लिक में होमस्क्रीन पर जोड़ें और सबसे तेज़ ख़बरें पायें