कन्नड़ समर्थक संगठनों ने बेंगलुरु के आईटी पार्कों और निजी कंपनियों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की मांग तेज कर दी है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- कन्नड़ समर्थक संगठनों ने बेंगलुरु के आईटी पार्कों और निजी कंपनियों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की मांग तेज कर दी है।
- कन्नड़ समर्थक संगठनों ने IT कंपनियों से स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग की (फोटो- सोशल मीडिया)
- कन्नड़ संगठनों ने आईटी पार्कों में स्थानीय नौकरियों की मांग की।
कन्नड़ समर्थक संगठनों ने IT कंपनियों से स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग की (फोटो- सोशल मीडिया)
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
कन्नड़ संगठनों ने आईटी पार्कों में स्थानीय नौकरियों की मांग की।
मुख्यमंत्री ने संगठनों से सीधे कंपनियों में न जाने की अपील की।
कंपनियों से भर्ती आंकड़े और स्थानीय अनुपात की जानकारी मांगी।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। कर्नाटक में काम कर रही निजी और आईटी कंपनियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग को लेकर कन्नड़ समर्थक संगठनों ने अभियान तेज कर दिया है। बेंगलुरु में कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ता आईटी पार्कों में घुस गए और स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों की मांग की।
शिवकुमार की ओर से कन्नड़ समर्थक संगठनों से कंपनियों में सीधे न जाने की अपील के बावजूद यह अभियान जारी है। कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं ने पूरे बेंगलुरु में आईटी पार्कों और निजी कंपनियों का दौरा करना शुरू कर दिया है। उनकी मांग है कि कन्नड़ भाषी लोगों (KRV) को रोजगार के अधिक अवसर मिलें।
KRV कार्यकर्ताओं की कई टीमें बेंगलुरु और राज्य के अन्य हिस्सों में फैल गई हैं। संगठन की टीमों ने कंपनियों के प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर कर्मचारियों में स्थानीय लोगों के अनुपात और पिछले तीन वर्षों के भर्ती आंकड़ों का पूरा ब्योरा मांगा है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा, 'मैं सभी संगठनों से अपील करता हूं कि वे सीधे आईटी-बीटी कंपनियों के पास न जाएं और न ही मामलों को अपने हाथों में लें। ऐसे मुद्दों को बातचीत के जरिए और कानून के दायरे में रहकर ही सुलझाया जाना चाहिए। हमारी सरकार कन्नडिगाओं के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।'
हालांकि, KRV की टीमें निजी संस्थानों का दौरा कर रही हैं। वे कंपनियों से उन आरोपों के बारे में जवाब मांग रही हैं, जिनमें कहा गया है कि योग्य स्थानीय उम्मीदवारों को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं।