सुप्रीम कोर्ट ने नीट-पीजी परीक्षा की आंसर-की सीमित रूप से जारी करने की एनबीईएमएस की नीति पर असंतोष व्यक्त किया है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- सुप्रीम कोर्ट ने नीट-पीजी परीक्षा की आंसर-की सीमित रूप से जारी करने की एनबीईएमएस की नीति पर असंतोष व्यक्त किया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने NBEMS की आंसर-की नीति पर असंतोष जताया।
- कोर्ट ने पूछा, प्रश्नपत्र देने से शुचिता कैसे प्रभावित होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने NBEMS की आंसर-की नीति पर असंतोष जताया।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
कोर्ट ने पूछा, प्रश्नपत्र देने से शुचिता कैसे प्रभावित होगी?
NBEMS ने सीमित प्रश्न बैंक का हवाला दिया, जवाब मांगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस (एनबीईएमएस) की मौजूदा नीति पर अंसतोष जताया है। साथ ही सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर वह नीट-पीजी परीक्षा की आंसर-की सीमित रूप से ही जारी करने पर क्यों जोर दे रहा है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने एनबीईएमएस से पूछा कि परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र की कॉपी रखने की अनुमति देने से परीक्षा की शुचिता कैसे प्रभावित हो सकती है? अदालत ने इस संबंध में लिखित जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह सुनवाई राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा स्नातकोत्तर (नीट-पीजी) से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर दायर याचिकाओं के समूह पर हो रही थी, जिसमें आंसर-की जारी करने का मुद्दा भी शामिल था।
एनबीईएमएस के वकील ने कहा कि स्नातकोत्तर परीक्षा के प्रश्नों का भंडार बहुत सीमित है और इसी वजह से इसे राष्ट्रीय संपत्ति माना जाता है। बोर्ड की ओर से दलील दी गई कि देशभर से विशेषज्ञों को बुलाकर प्रश्न तैयार कराए जाते हैं।
यदि हर साल प्रश्नों को सार्वजनिक किया जाने लगा, तो कुछ वर्षों में पूरा प्रश्न बैंक सामने आ जाएगा। एक वकील ने कहा कि पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र एमेजोन पर बेचे जाते थे, जिससे पारदर्शिता का सवाल उठता है।
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