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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

शादी पूरी तरह टूटने के आधार पर विदेशी अदालत का तलाक वैध नहीं :सुप्रीम कोर्ट ने ब्रिटेन से तलाक लेने वाले डॉक्टर की याचिका खारिज की

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: मंगल, 3 नव॰ 2026, 05:16 pm
समाचार एजेंसी Dainik Jagran
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शादी पूरी तरह टूटने के आधार पर विदेशी अदालत का तलाक वैध नहीं :सुप्रीम कोर्ट ने ब्रिटेन से तलाक लेने वाले डॉक्टर की याचिका खारिज की
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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विवाह के अपूरणीय रूप से टूटने के आधार पर विदेशी अदालत द्वारा दिया गया तलाक भारत में वैध नहीं है।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विवाह के अपूरणीय रूप से टूटने के आधार पर विदेशी अदालत द्वारा दिया गया तलाक भारत में वैध नहीं है।
  • विवाह के अपूरणीय टूटने पर विदेशी तलाक भारत में अमान्य।
  • विवाह के अपूरणीय टूटने पर विदेशी तलाक भारत में अमान्य।

विवाह के अपूरणीय टूटने पर विदेशी तलाक भारत में अमान्य।

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

विवाह के अपूरणीय टूटने पर विदेशी तलाक भारत में अमान्य।

सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी शादी के आरोपी की याचिका खारिज की।

यह फैसला भारतीय वैवाहिक कानून और सीपीसी धारा 13 के तहत।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि विवाह के अपूरणीय रूप से टूटने के आधार पर विदेशी अदालत द्वारा दिया गया तलाक वैध नहीं है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने यह टिप्पणी उस व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें उसने दो विवाह करने और आपराधिक साजिश के मामले को रद करने की मांग की थी।

पीठ ने कहा, 'विदेशी अदालत ने भारत में लागू वैवाहिक कानून का उल्लंघन करते हुए तलाक मंजूर किया। साथ ही, यह ऐसा आधार है जिसे कानून में मान्यता भी नहीं दी गई है। यह न सिर्फ सीपीसी की धारा-13 की कानूनी कसौटी का उल्लंघन करता है, जिस पर हर विदेशी डिक्री को खरा उतरना होता है, बल्कि भारत में लागू होने योग्य विदेशी डिक्री के लिए जरूरी शर्तों पर इस अदालत की टिप्पणियों का भी उल्लंघन करता है।'

मामले पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, 'हम इस दलील को उस रूप में स्वीकार नहीं कर सकते, जिस रूप में इसे पेश किया गया है। आरोपित नंबर-1 यानी पति की शादी भारत में प्रतिवादी नंबर-2 यानी पहली पत्नी से हिंदू रीति-रिवाजों व परंपराओं के अनुसार हुई थी।

दूसरी शादी भारत के बाहर भी हुई हो, तब भी भारतीय दंड संहिता की धारा-494 के तहत लगे आरोपों को कमतर नहीं माना जा सकता। दो विवाह के अपराध की जांच केवल दूसरी शादी की जगह तक सीमित नहीं हो सकती; इसमें मौजूदा वैवाहिक संबंध को भी ध्यान में रखना जरूरी है।'

इस मामले में व्यक्ति की पहली शादी 18 अप्रैल, 2003 को आंध्र प्रदेश के सत्तेनपल्ली में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। शादी के बाद दोनों हैदराबाद में रहने लगे, जहां पति उस्मानिया मेडिकल कालेज से स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहा था। 4 फरवरी, 2005 को वह डॉक्टर के रूप में अपना करियर बनाने ब्रिटेन चला गया और बाद में उसकी पत्नी भी वहां पहुंच गई।

रिपोर्टिंग स्रोत: Dainik Jagran मूल रिपोर्ट देखें

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