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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

'जेलों में जातिगत भेदभाव पर राज्यों की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण', सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: मंगल, 3 नव॰ 2026, 05:22 pm
समाचार एजेंसी Dainik Jagran
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सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में जातिगत भेदभाव और अमानवीय प्रथाओं पर 23 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की प्रतिक्रिया न देने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में जातिगत भेदभाव और अमानवीय प्रथाओं पर 23 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की प्रतिक्रिया न देने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में जातिगत भेदभाव पर जताई नाराजगी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में जातिगत भेदभाव पर जताई नाराजगी।

सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में जातिगत भेदभाव पर जताई नाराजगी।

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में जातिगत भेदभाव पर जताई नाराजगी।

23 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने जानकारी नहीं दी, कोर्ट नाराज।

जवाब न देने पर मुख्य सचिवों को पेश होने की चेतावनी।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जेलों के भीतर जातिगत भेदभाव और अमानवीय प्रथाओं से जुड़े एक संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

कोर्ट ने कहा कि यह अत्यंत "दुखद" और दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार द्वारा मांगी गई आवश्यक जानकारी पर अभी तक 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता करार देते हुए गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

पार्डीवाला और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने 'जेलों के भीतर भेदभाव' से जुड़े स्वतः संज्ञान वाले मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एस

मुरलीधर के उन सुझावों का भी संज्ञान लिया, जिसमें राज्यों द्वारा जिला-स्तरीय 'बोर्ड आफ विजिटर्स' के गठन जैसे जरूरी कदमों पर रिपोर्ट न देने की बात उठाई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सहयोग न करने वाले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी प्रतिक्रिया देने का यह अंतिम अवसर प्रदान किया है।

रिपोर्टिंग स्रोत: Dainik Jagran मूल रिपोर्ट देखें

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