नौकरी के लिए गया था रूस: भारतीय युवक को सेना में भर्ती कर यूक्रेन बॉर्डर भेजा; मां की गुहार- मेरा बेटा लौटा दो- young man from Andhra Pradesh went to Russia for job but recruited into army and sent to Ukraine border
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम का रहने वाला एक युवक रूस में नौकरी करने गया था, लेकिन अब उसकी जान खतरे में है। आरोप है कि उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर रूसी सेना में भर्ती करा दिया गया और अब यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र में भेजा जा रहा है। बेटे की सलामती को लेकर परेशान मां ने केंद्र सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार से उसे सुरक्षित भारत वापस लाने की अपील की है। फल पैकिंग की नौकरी के लिए गया था रूस विशाखापत्तनम निवासी जे
- अप्पालाकोंडा ने बताया कि उनका बेटा रोजगार की तलाश में रूस गया था। उसे वहां फलों की पैकिंग का काम मिलने की उम्मीद थी, लेकिन रूस पहुंचने के बाद उसे कोई नौकरी नहीं मिली। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक नेपाली नागरिक से हुई। उसने वामसी को यूक्रेन में अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। आरोप है कि इसी झांसे में आकर वामसी उसके साथ चला गया और बाद में उसे रूसी सेना में शामिल कर लिया गया। 'मुझे सिर्फ अपना बेटा वापस चाहिए' बेटे के लापता होने और उसकी जान पर मंडरा रहे खतरे से मां बेहद परेशान हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन
- चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और आईटी मंत्री नारा लोकेश से मदद की गुहार लगाई है। अप्पालाकोंडा ने कहा कि उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। उनके पति भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। ऐसे में बेटे की सुरक्षा को लेकर वह काफी चिंतित हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा, "मेरे पास कोई नहीं है। मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस मेरा बेटा सुरक्षित वापस आ जाए।" वामसी समेत पांच भारतीयों ने वीडियो जारी कर मांगी मदद इस मामले में एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें वामसी होने का दावा करने वाला एक व्यक्ति चार अन्य भारतीयों के साथ अपनी परेशानी बता रहा है। वीडियो में सभी का कहना है कि वे रूस में नौकरी करने गए थे, लेकिन उन्हें धोखे से रूसी सेना में भर्ती करा दिया गया। अब उन्हें रूस-यूक्रेन सीमा के पास युद्ध के मोर्चे पर भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें अपनी जान का खतरा है और किसी भी समय उनके साथ अनहोनी हो सकती है। रूसी नागरिकता देने का भी किया दावा वीडियो में वामसी होने का दावा करने वाले व्यक्ति ने एक और गंभीर बात कही। उसके मुताबिक, उन्हें पता ही नहीं था कि उन्हें रूसी नागरिकता दे दी गई है। जब उन्होंने अपनी नागरिकता के बारे में जानकारी मांगी, तब उन्हें बताया गया कि अब वे भारतीय नागरिक नहीं, बल्कि रूसी नागरिक हैं। युवक ने कहा कि वे भारतीय नागरिकता ही रखना चाहते हैं और रूस की नागरिकता नहीं लेना चाहते थे। अगर उन्हें पहले से इस बारे में पता होता तो वे कभी इसके लिए तैयार नहीं होते। बिना समझे रूसी भाषा में कराए गए दस्तखत युवकों ने आरोप लगाया कि उनसे रूसी भाषा में लिखे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्हें इन दस्तावेजों में क्या लिखा था, इसकी जानकारी नहीं थी। अब उन्हें युद्ध क्षेत्र में भेजे जाने की बात कही जा रही है। वीडियो में युवकों ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि आगे उनके साथ क्या होने वाला है। उन्होंने आशंका जताई कि यह उनके आखिरी शब्द भी हो सकते हैं। सभी ने भारत सरकार से जल्द से जल्द हस्तक्षेप करने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की अपील की है। ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रिफाइनरी में आग: विशाखापत्तनम में विस्फोट के बाद दिखा धुएं का गुबार, दमकलकर्मी पहुंचे नारा लोकेश ने अधिकारियों को दिए मदद के निर्देश मामला सामने आने के बाद आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने भी चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि विदेश में फंसे भारतीयों की हालत देखकर दुख हो रहा है। उन्होंने अपने कार्यालय को संबंधित अधिकारियों के साथ तुरंत संपर्क करने और प्रभावित लोगों की मदद के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। लोकेश ने भरोसा दिलाया कि युवकों की सुरक्षित और जल्द वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
अप्पालाकोंडा ने बताया कि उनका बेटा रोजगार की तलाश में रूस गया था। उसे वहां फलों की पैकिंग का काम मिलने की उम्मीद थी, लेकिन रूस पहुंचने के बाद उसे कोई नौकरी नहीं मिली। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक नेपाली नागरिक से हुई। उसने वामसी को यूक्रेन में अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। आरोप है कि इसी झांसे में आकर वामसी उसके साथ चला गया और बाद में उसे रूसी सेना में शामिल कर लिया गया। 'मुझे सिर्फ अपना बेटा वापस चाहिए' बेटे के लापता होने और उसकी जान पर मंडरा रहे खतरे से मां बेहद परेशान हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और आईटी मंत्री नारा लोकेश से मदद की गुहार लगाई है। अप्पालाकोंडा ने कहा कि उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। उनके पति भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। ऐसे में बेटे की सुरक्षा को लेकर वह काफी चिंतित हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा, "मेरे पास कोई नहीं है। मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस मेरा बेटा सुरक्षित वापस आ जाए।" वामसी समेत पांच भारतीयों ने वीडियो जारी कर मांगी मदद इस मामले में एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें वामसी होने का दावा करने वाला एक व्यक्ति चार अन्य भारतीयों के साथ अपनी परेशानी बता रहा है। वीडियो में सभी का कहना है कि वे रूस में नौकरी करने गए थे, लेकिन उन्हें धोखे से रूसी सेना में भर्ती करा दिया गया। अब उन्हें रूस-यूक्रेन सीमा के पास युद्ध के मोर्चे पर भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें अपनी जान का खतरा है और किसी भी समय उनके साथ अनहोनी हो सकती है। रूसी नागरिकता देने का भी किया दावा वीडियो में वामसी होने का दावा करने वाले व्यक्ति ने एक और गंभीर बात कही। उसके मुताबिक, उन्हें पता ही नहीं था कि उन्हें रूसी नागरिकता दे दी गई है। जब उन्होंने अपनी नागरिकता के बारे में जानकारी मांगी, तब उन्हें बताया गया कि अब वे भारतीय नागरिक नहीं, बल्कि रूसी नागरिक हैं। युवक ने कहा कि वे भारतीय नागरिकता ही रखना चाहते हैं और रूस की नागरिकता नहीं लेना चाहते थे। अगर उन्हें पहले से इस बारे में पता होता तो वे कभी इसके लिए तैयार नहीं होते। बिना समझे रूसी भाषा में कराए गए दस्तखत युवकों ने आरोप लगाया कि उनसे रूसी भाषा में लिखे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। उन्हें इन दस्तावेजों में क्या लिखा था, इसकी जानकारी नहीं थी। अब उन्हें युद्ध क्षेत्र में भेजे जाने की बात कही जा रही है। वीडियो में युवकों ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि आगे उनके साथ क्या होने वाला है। उन्होंने आशंका जताई कि यह उनके आखिरी शब्द भी हो सकते हैं। सभी ने भारत सरकार से जल्द से जल्द हस्तक्षेप करने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की अपील की है। ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान पेट्रोलियम की रिफाइनरी में आग: विशाखापत्तनम में विस्फोट के बाद दिखा धुएं का गुबार, दमकलकर्मी पहुंचे नारा लोकेश ने अधिकारियों को दिए मदद के निर्देश मामला सामने आने के बाद आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने भी चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि विदेश में फंसे भारतीयों की हालत देखकर दुख हो रहा है। उन्होंने अपने कार्यालय को संबंधित अधिकारियों के साथ तुरंत संपर्क करने और प्रभावित लोगों की मदद के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। लोकेश ने भरोसा दिलाया कि युवकों की सुरक्षित और जल्द वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जाएंगे।