रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 53,866 करोड़ रुपये के आठ नए युद्धपोत खरीदने का अनुबंध किया है, जिससे हिंद महासागर में नौसेना की ताकत बढ़ेगी।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 53,866 करोड़ रुपये के आठ नए युद्धपोत खरीदने का अनुबंध किया है, जिससे हिंद महासागर में नौसेना की ताकत बढ़ेगी।
- रक्षा मंत्रालय ने 53,866 करोड़ के 8 युद्धपोतों का अनुबंध किया।
- जीआरएसई और जीएसएल द्वारा स्वदेशी डिजाइन पर युद्धपोत बनेंगे।
रक्षा मंत्रालय ने 53,866 करोड़ के 8 युद्धपोतों का अनुबंध किया।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
जीआरएसई और जीएसएल द्वारा स्वदेशी डिजाइन पर युद्धपोत बनेंगे।
नौसेना की युद्धक क्षमता और समुद्री व्यापार सुरक्षा बढ़ेगी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारतीय नौसेना की ताकत को और मजबूत करने की तैयारी है। रक्षा मंत्रालय ने 53,866 करोड़ रुपये की लागत से अगली पीढ़ी के आठ युद्धपोत खरीदने के लिए दो सरकारी कंपनियों के साथ अनुबंध किया है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत जीआरएसई को पांच और जीएसएल को तीन युद्धपोत बनाने हैं। इन युद्धपोतों में अत्याधुनिक मिसाइलें, हथियार और सेंसर प्रणाली लगाई जाएगी, जिससे नौसेना की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
बताया जा रहा है कि यह पहली ऐसी परियोजना है जिसमें युद्धपोतों का डिजाइन भारतीय नौसेना खुद तैयार करेगी और इन युद्धपोतों को रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनी बनाएगी। यह स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि परियोजना से अगले 10 वर्षों में शिपयार्ड में करीब 72 लाख और सहायक उद्योगों तथा एमएसएमई में 460 लाख मानव-दिवस का रोजगार पैदा होगा। इन युद्धपोतों से समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों के खिलाफ कार्रवाई, तटीय रक्षा, समुद्री निगरानी और तटीय जलक्षेत्र में सैन्य अभियान चलाने की क्षमता बढ़ेगी।
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