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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

जानना जरूरी: हर साल 18 लाख से ज्यादा लोग हो रहे ब्रेन की इस जानलेवा बीमारी का शिकार, जानिए कैसे टालें खतरा

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: शुक्र, 6 नव॰ 2026, 09:46 pm
समाचार एजेंसी Amar Ujala
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ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिमाग तक खून की सप्लाई रुक जाती है या नस फट जाती है। इसमें चेहरा एक ओर झुकने, हाथ में कमजोरी और बोलने में परेशानी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए शरीर के मास्टर यानी ब्रेन हेल्थ का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। मस्तिष्क को हमारे शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र माना जाता है जो कंप्यूटर के सीपीयू की तरह काम करता है। यह शरीर के सभी अंगों, हमारी सोच, भावनाओं, और गतिविधियों को संचालित करता है।  अगर इसमें किसी भी तरह की दिक्कत आ जाती है तो इससे पूरे शरीर का कामकाज बाधित हो सकता है। .metering_wall_container {min-height:58px;max-height:58px;position:relative;transition:max-height 0.5s ease-in-out;}
  • ब्रेन स्ट्रोक में दिमाग के किसी हिस्से तक खून पहुंचना बंद हो जाता है या दिमाग की कोई नस फट जाती है। इससे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है। कई बार मरीज अचानक बोलना बंद कर देता है, उसका चेहरा एक तरफ झुक जाता है या हाथ-पैर में कमजोरी आ जाती है।
  • सबसे बड़ी परेशानी ये है कि लोग इन संकेतों को अक्सर चक्कर, थकान या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

ब्रेन स्ट्रोक में दिमाग के किसी हिस्से तक खून पहुंचना बंद हो जाता है या दिमाग की कोई नस फट जाती है। इससे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है। कई बार मरीज अचानक बोलना बंद कर देता है, उसका चेहरा एक तरफ झुक जाता है या हाथ-पैर में कमजोरी आ जाती है।

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

सबसे बड़ी परेशानी ये है कि लोग इन संकेतों को अक्सर चक्कर, थकान या उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

स्ट्रोक में समय सबसे अहम होता है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रतीक गोस्वामी बताते हैं, एक आसान तरीका है जिसकी मदद से कुछ ही सेकंड में स्ट्रोक के शुरुआती संकेत पहचाना  जा सकते हैं, इसे FAST (फास्ट) टेस्ट कहते हैं। आइए इस बारे में जान लेते हैं।

ब्रेन स्ट्रोक का खतरा युवाओं में तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला इस्केमिक स्ट्रोक है जिसमें खून का थक्का दिमाग की नस में रुकावट पैदा कर देता है। वहीं दूसरा हेमोरेजिक स्ट्रोक है, जब दिमाग की कोई नस फट जाती है और ब्लीडिंग होने लगता है तो इससे स्ट्रोक हो सकता है।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

स्ट्रोक की पहचान के लिए FAST एक आसान तरीका है।

स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर बिल्कुल इंतजार न करें। तुरंत मरीज को अस्पताल लेकर जाएं जिससे जरूरी उपचार हो सके।

मरीज को खाने-पीने के लिए कुछ न दें और डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन जैसी दवा न दें, क्योंकि स्ट्रोक का कारण नस में रुकावट या नस का फटना दोनों हो सकता है। स्ट्रोक में जितनी जल्दी इलाज मिलता है, दिमाग को होने वाले नुकसान को कम करने की संभावना उतनी बेहतर होती है। समय पर लक्षणों की पहचान और इलाज से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

रिपोर्टिंग स्रोत: Amar Ujala मूल रिपोर्ट देखें

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