Indian Govt May Remove Safe Harbour Rule: भारत सरकार सोशल फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मिलने वाली कानूनी छूट को खत्म कर सकती है। आईटी मंत्रालय इन कंपनियों को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' का अधिकार
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- Indian Govt May Remove Safe Harbour Rule: भारत सरकार सोशल फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मिलने वाली कानूनी छूट को खत्म कर सकती है। आईटी मंत्रालय इन कंपनियों को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' का अधिकार
हरिश मामले में कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को सोशल मीडिया पर फैलने से रोकने में कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे। 15 अक्टूबर के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा धारा 79 लगातार हो रही नियामकीय चूक से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट के मुताबिक, सामान्य नियमों का पालन न करने पर सेफ हार्बर खत्म करना बहुत कड़ा कदम हो सकता है, जबकि गंभीर उल्लंघनों को रोकने के लिए यह हमेशा पर्याप्त भी नहीं है। कोर्ट ने अलग व्यवस्था बनाने की बात कही, जिसमें गलती की गंभीरता के हिसाब से आर्थिक जुर्माना लगाया जा सके। सेफ हार्बर खत्म करने जैसे कदम को गंभीर मामलों में आखिरी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया। इससे पहले अगस्त में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने भी सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। समिति ने भारतीय कानूनों का पालन नहीं करने वाले प्लेटफॉर्म से सेफ हार्बर सुरक्षा वापस लेने की सिफारिश की थी। नए फीचर लॉन्च करने से पहले देनी पड़ सकती है जानकारी सरकार केवल सेफ हार्बर तक ही बदलाव सीमित नहीं रखना चाहती। वह इस बात पर भी विचार कर रही है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को अपने बड़े और यूजर्स की सुरक्षा से जुड़े नए फीचर लॉन्च करने से पहले सरकार को जानकारी देनी चाहिए। इस प्रस्ताव के पीछे वॉट्सऐप के यूजरनेम फीचर को लेकर हुआ विवाद भी एक वजह है। इस फीचर के जरिए यूजर्स बिना फोन नंबर साझा किए एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। जुलाई में आईटी मंत्रालय ने व्हाट्सएप को इस फीचर का रोलआउट रोकने का निर्देश दिया था। मंत्रालय को आशंका थी कि इसका गलत इस्तेमाल करके फर्जी पहचान, फिशिंग और आर्थिक धोखाधड़ी की जा सकती है। सरकार अब ऐसा औपचारिक सिस्टम बनाने पर विचार कर रही है, जिसके तहत कंपनियां किसी बड़े बदलाव को लागू करने से पहले उसकी जानकारी दे सकें। इससे संभावित सुरक्षा जोखिमों पर पहले ही चर्चा की जा सकेगी। डीपफेक और आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायतों पर भी सख्ती सरकार सोशल मीडिया यूजर्स के लिए शिकायत दर्ज कराने और उसका समाधान पाने की मौजूदा व्यवस्था में भी बदलाव चाहती है। खासतौर पर डीपफेक, बिना सहमति के शेयर की गई निजी तस्वीरों और आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के लिए ज्यादा प्रभावी सिस्टम बनाने पर चर्चा हो रही है। सरकार का मानना है कि अभी ऐसे मामलों में पीड़ितों को पर्याप्त मदद नहीं मिलती। कई बार शिकायतों पर कार्रवाई का फैसला प्लेटफॉर्म की अपनी कंटेंट मॉडरेशन टीमों पर निर्भर रहता है। प्रस्तावित बदलावों के तहत कंपनियों को प्रभावित यूजर्स की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए कहा जा सकता है। फिलहाल ये सभी प्रस्ताव चर्चा के स्तर पर हैं। अगर सरकार इन्हें लागू करने का फैसला करती है, तो सोशल मीडिया कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी और भारत में उनके काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।