सुप्रीम कोर्ट ने बागी टीएमसी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- सुप्रीम कोर्ट ने बागी टीएमसी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
- सुप्रीम का याचिका पर सुनवाई से इनकार। (फाइल फोटो।)
- सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से किया इनकार।
सुप्रीम का याचिका पर सुनवाई से इनकार। (फाइल फोटो।)
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से किया इनकार।
याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट के एक नेता की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की मांग की थी कि वे बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाओं पर जल्द फैसला लें। कोर्ट ने उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट जाने को कहा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया। पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया कि वे इस मामले को सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच (खंडपीठ) के समक्ष रखें।
पीठ ने आदेश दिया, "हमें लगता है कि याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख करना चाहिए। इसलिए, हम इस स्तर पर इस याचिका का निपटारा करते हैं और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट में उचित याचिका दायर करने की छूट देते हैं। हम हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वे इस मामले को तत्काल विचार के लिए डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करें और जल्द से जल्द इस पर फैसला लें।"
शुरुआत में, पीठ ने गौर किया कि विधानसभा अध्यक्ष से यह उम्मीद की जाती है कि वे 8 जुलाई को दायर अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर फैसला लें।चट्टोपाध्याय की ओर से पेश वकील ने कहा कि बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं जुलाई में दायर की गई थीं, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी इन पर कोई फैसला नहीं आया है।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "हम आपकी बात समझते हैं। लेकिन आप अपनी बारी से पहले सुनवाई पाने के लिए कानूनी लड़ाई नहीं लड़ सकते।" वकील ने पीठ से आग्रह किया कि वह हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच को इस मामले पर विचार करने का निर्देश दे, ताकि यह मामला कोर्ट के भीतर होने वाली अपीलों के किसी और दौर में न फंस जाए।