सुप्रीम कोर्ट में अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षित सीटों के रोटेशन पर सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से हल्के-फुल्के अंदाज में विरोध-प्रदर्शन करने को कहा।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- सुप्रीम कोर्ट में अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षित सीटों के रोटेशन पर सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से हल्के-फुल्के अंदाज में विरोध-प्रदर्शन करने को कहा।
- CJI ने याचिकाकर्ताओं से विरोध-प्रदर्शन करने को कहा।
- SC/ST आरक्षित सीटों के रोटेशन पर सुनवाई थी।
CJI ने याचिकाकर्ताओं से विरोध-प्रदर्शन करने को कहा।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
SC/ST आरक्षित सीटों के रोटेशन पर सुनवाई थी।
मुख्य न्यायाधीश ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को देश में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र आया, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि उन्होंने अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया और इसके बजाय विरोध-प्रदर्शन क्यों नहीं किया?
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
संसद और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों को अनिवार्य रूप से रोटेट करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की, 'आप गलत नंबर डायल कर रहे हैं, यह तो विरोध-प्रदर्शनों का दौर है। शायद आपको भी ऐसा ही करना चाहिए।'
याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब दिया कि उनका विरोध करने का कोई इरादा नहीं है, और ऊपर से उनका गला भी खराब है।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के 191-कादीपुर विधानसभा क्षेत्र के एक मतदाता, जगदीश सिंह ने एक याचिका दायर की थी। इनमें उन्होंने इस बात को चुनौती दी थी कि 1952 में हुए पहले चुनाव के बाद से, सात दशकों से भी अधिक समय से यह सीट एससी के लिए के लिए आरक्षित क्यों है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे केवल चार-पांच परिवारों को ही फायदा हुआ है। उन्होंने मांग की कि काम से कम अधिकारियों को यह निर्देश दिया जाए कि वे विधानसभा सीटों के आरक्षण के लिए रोटेशन सिस्टम लागू करने पर विचार करें, एक ऐसी व्यवस्था जो पंचायत और नगर निकाय चुनावों में पहले से ही लागू है।
उन्होंने तर्क दिया कि रोटेशन व्यवस्था न होने से संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 का उल्लंघन होता है। साथ ही, इससे मतदाताओं के पास मौजूद विकल्प भी सीमित हो जाते हैं, क्योंकि वे केवल SC समुदाय के उम्मीदवार को ही चुन सकते हैं।