तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी पीठ स्थापित करने की मांग की है। उनका तर्क है कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों के लोगों को न्याय तक समान पहुंच मिलेगी और यात्रा व मुकदमेबाजी का खर्च कम होगा।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी पीठ स्थापित करने की ...और पढ़ें
- मुख्यमंत्री विजय ने पीएम मोदी को पत्र लिखा।
- चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी पीठ की मांग।
मुख्यमंत्री विजय ने पीएम मोदी को पत्र लिखा।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी पीठ की मांग।
दक्षिण भारत के लोगों को न्याय में सुविधा।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी पीठ स्थापित करने की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाने और स्थायी पीठ की स्थापना के लिए अनुकूल निर्णय कराने की अपील की है। विजय का कहना है कि चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की पीठ बनने से केवल तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के सभी राज्यों के लोगों को लाभ मिलेगा।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि देश के संघीय ढांचे की वास्तविक भावना के अनुरूप न्यायपालिका तक सभी नागरिकों की समान पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की क्षेत्रीय पीठ स्थापित करने की मांग वर्ष 1980 से उठाई जा रही है। इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं हो सका है।
दिल्ली पहुंचने में दक्षिण भारत के लोगों को होती है परेशानी
विजय ने पत्र में दक्षिण भारत के राज्यों से दिल्ली की दूरी को एक बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में न्याय पाने के लिए इन राज्यों के लोगों को लंबी दूरी तय करके नई दिल्ली आना पड़ता है। इससे न केवल उनका समय बर्बाद होता है, बल्कि यात्रा और मुकदमेबाजी पर होने वाला खर्च भी बढ़ जाता है।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए कहा कि यह नागरिकों को मौलिक अधिकारों के संरक्षण और उनके प्रवर्तन के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है।
संविधान निर्माताओं का उद्देश्य था कि यह अधिकार अमीर और गरीब, हर नागरिक के लिए समान रूप से सुलभ हो। हालांकि, समय के साथ यह व्यवस्था व्यावहारिक रूप से उन लोगों के लिए अधिक आसान हो गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के नजदीक रहते हैं और यात्रा व मुकदमे का खर्च उठा सकते हैं।