दो से ज्यादा बच्चे तो चुनाव नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा- कानून पर विचार करने की जरूरत, क्या है नियम? No election for those with more than two children Why did Supreme Court say there need to consider such a law
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- दो से ज्यादा बच्चे तो चुनाव नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा- कानून पर विचार करने की जरूरत, क्या है नियम? No election for those with more than two children Why did Supreme Court say there need to consider such a law
नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(j-1) के तहत ककोडा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव पर उनके तीसरे बच्चे के जन्म के कारण लगाई गई अयोग्यता को भी रद्द कर दिया। 1959 के इस अधिनियम में 13 सितंबर, 2000 से दो से अधिक बच्चे होने पर रोक (कैप) लगा दी गई थी। अदालत ने कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2003 में तीन थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने 'जावेद बनाम हरियाणा राज्य' मामले में 'दो बच्चों के नियम' की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, जो अब घटकर 1.9 रह गई है। अदालत ने गौर किया कि प्रजनन दर में यह गिरावट, जो अब 2.1 के 'रिप्लेसमेंट स्तर' से भी नीचे आ गई है, जल्द ही एक ऐसे जनसांख्यिकीय बदलाव (डेमोग्राफिक ट्रांजिशन) की ओर ले जाएगी, जिसमें आबादी की उम्र बढ़ेगी और कामकाजी उम्र के लोगों की हिस्सेदारी कम हो जाएगी। कितने राज्यों में दो बच्चों के नियम खत्म हुए? बोबडे द्वारा पेश की गई जानकारी के अनुसार, सात राज्यों ने 'दो बच्चों के नियम' को खत्म कर दिया है, जबकि पंद्रह राज्यों में ऐसी कोई नीति नहीं है। संक्षेप में कहें तो, सभी राज्यों में इसे लेकर कोई एक समान नीति नहीं है। जिन राज्यों में अभी भी 'दो बच्चों का नियम' लागू है, उनमें असम, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड शामिल हैं।