दिल्ली में आयोजित हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने समुद्र में सुरक्षा को प्रभावित करने वाले कारकों की सामूहिक समझ बढ़ाने और क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने की भी पैरवी की।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
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- हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने अपनी बात रखी
- हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने अपनी बात रखी
हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने अपनी बात रखी
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने अपनी बात रखी
नौसेना प्रमुख ने कहा, समुद्र में सुरक्षा को प्रभावित करने वाले कारकों की समझ़ बढ़ानी होगी
पीटीआई, नई दिल्ली। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने बुधवार को कहा कि आज की दुनिया तेज प्रतिस्पर्धा और खींचतान, बदलते शक्ति-समीकरणों, बड़े तकनीकी बदलावों और परस्पर प्रतिस्पर्धी रणनीतिक हितों के दौर से गुजर रही है। समुद्री क्षेत्र इन घटनाक्रमों से अछूता नहीं है, बल्कि इनके केंद्र में है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
दिल्ली में आयोजित हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) में उन्होंने समुद्र में सुरक्षा को प्रभावित करने वाले कारकों की सामूहिक समझ बढ़ाने और क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने की भी पैरवी की।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि नवंबर 2019 में बैंकाक में 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओआइ) शुरू की थी। इसने सात स्तंभों के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग का एक ढांचा दिया। आईपीआरडी 2026 का विषय-विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अकादमिक सहयोग सीधे तौर पर इन्हीं स्तंभों में से एक से जुड़ा है।”
उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत शब्द के रणनीतिक शब्दावली में शामिल होने से बहुत पहले ही प्रकृति ने दोनों महासागरों को पूरी तरह सामंजस्य के साथ जोड़ दिया था-सतह के नीचे जलधाराओं के जरिये और सतह के ऊपर जलवायु के माध्यम से।
इंडोनेशियाई द्वीपसमूह से होकर समुद्री धाराएं हर सेकंड प्रशांत महासागर से हिंद महासागर में करीब 1.5 करोड़ घन मीटर पानी ले जाती हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आईपीआरडी 2026 के एक सत्र में हिस्सा लिया। नौसेना प्रमुख ने कहा कि साझा हितों को सकारात्मक और व्यावहारिक नतीजों में बदलने तथा दीर्घकालिक क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करने की जरूरत है। आईपीआरडी 2026 इसमें छोटी, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।