अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के कांग्रेस का नियंत्रण खोने के बावजूद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नीतियां तय करने की ताकत पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के कांग्रेस का नियंत्रण खोने के बावजूद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नीतियां तय करने की ताकत पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा।
- कांग्रेस में बहुमत गंवाने के बावजूद तुरंत नहीं घटेगी ट्रंप की ताकत।
- अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ट्रंप की नीतिगत ताकत तुरंत कम नहीं होगी।
कांग्रेस में बहुमत गंवाने के बावजूद तुरंत नहीं घटेगी ट्रंप की ताकत।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ट्रंप की नीतिगत ताकत तुरंत कम नहीं होगी।
कार्यकारी आदेशों पर ट्रंप की बढ़ती निर्भरता मुख्य कारण है।
'लेम-डक' सत्र में विधेयक पारित कराने का अवसर मिलेगा।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस (संसद) का नियंत्रण खो भी देती है, तो राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नीतियां तय करने और उन्हें लागू करने की ताकत पर तुरंत असर पड़ने की संभावना कम है। इसकी बड़ी वजह कार्यकारी आदेशों पर उनकी बढ़ती निर्भरता और मौजूदा कांग्रेस के कार्यकाल के आखिरी सत्र में विधेयक पारित कराने की संभावनाएं हैं।
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने के बीच मध्यावधि चुनाव उनके लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने की संभावना ने उनके बाकी दो वर्षों के एजेंडे पर सवाल खड़े किए हैं।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की इकाई एमके रिसर्च के अनुसार, डेमोक्रेट दोनों सदनों पर कब्जा कर लेते हैं तो रिपब्लिकन का 'ट्राइफेक्टा' यानी राष्ट्रपति पद और कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण खत्म हो जाएगा। इससे ट्रंप 'लेम-डक' राष्ट्रपति की स्थिति में पहुंच सकते हैं।
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में नीतियों को लागू करने के लिए कार्यकारी आदेशों, टैरिफ, आपातकालीन शक्तियों और नियामकीय बदलावों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। अब तक वह 292 कार्यकारी आदेश जारी कर चुके हैं। यह संख्या 1981 के बाद किसी भी राष्ट्रपति के पूरे चार साल के कार्यकाल में जारी आदेशों से अधिक है। उनके पहले कार्यकाल में भी 220 कार्यकारी आदेश जारी हुए थे।
रिपब्लिकन के पास नवंबर 2026 से जनवरी 2027 तक मौजूदा कांग्रेस के कार्यकाल का आखिरी सत्र होगा। इसे 'लेम-डक' सत्र कहा जाता है। इस दौरान नई कांग्रेस के कार्यभार संभालने से पहले मौजूदा सदस्य काम करते हैं।