सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी राज्यों में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए अपनाई गई मौजूदा विधायी या कार्यकारी व्यवस्था का सार प्रस्तुत करने को कहा है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी राज्यों में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए अपनाई गई मौजूदा विधायी या कार्यकारी व्यवस्था का सार प्रस्तुत करने को कहा है।
- डीजीपी की नियुक्ति पर राज्यों के नियमों का ब्योरा दे केंद्र।
- सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी नियुक्ति नियमों पर केंद्र से जानकारी मांगी।
डीजीपी की नियुक्ति पर राज्यों के नियमों का ब्योरा दे केंद्र।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी नियुक्ति नियमों पर केंद्र से जानकारी मांगी।
झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी सवाल।
केंद्र को 16 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। डीजीपी की नियुक्तियों की जांच का दायरा बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से हर राज्य में पुलिस प्रमुखों के चयन और नियुक्ति के लिए अपनाई गई मौजूदा विधायी या कार्यकारी व्यवस्था का सार देने को कहा। पीठ ने केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्य बागची और वी.मोहना की पीठ ने झारखंड सरकार और राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा से भी केंद्र और अन्य पक्षों की याचिका पर जवाब मांगा। मिश्रा को सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया था। याचिका में उनकी नियुक्ति को चुनौती दी गई है।
पीठ की न्याय-मित्र के तौर पर सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन की दलीलों से सहमति जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा,"मुझे लगता है कि राजू सही कह रहे हैं कि केंद्र हर राज्य में डीजीपी की नियुक्ति के लिए अपनाई गई मौजूदा विधायी या कार्यकारी व्यवस्था का सार हमें दे सकता है।"
रामचंद्रन ने केंद्र और राज्यों को यह बताने का निर्देश देने की मांग की कि क्या उन्होंने डीजीपी की नियुक्तियों को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाया है या नियम तय किए हैं और, सबसे अहम, क्या इन प्रविधानों को लागू किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों ने झारखंड जैसे नियम बनाए हैं, लेकिन इसके बावजूद वे सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह संबंधी निर्देशों का पालन करने का दावा करते हैं। उन्होंने खास तौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब का जिक्र किया, जहां इसी तरह के प्रविधान होने की बात कही गई है।