16 साल की सेवदा की मौत के बाद उनकी मां समीरा की ज़िंदगी बदल गई. बेटी का शव तलाशने से लेकर उसे दफ़नाने तक उन्हें अधिकारियों से जूझना पड़ा. अब वह विदेश में छिपकर रह रही हैं और ईरानी सुरक्षाकर्मियों के नाम सार्वजनिक कर रही हैं.
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- चेतावनी: इस रिपोर्ट में परेशान करने वाली बातें हैं
- समीरा कहती हैं कि पहले उन्हें राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी
- वह बीबीसी पैनोरमा से कहती हैं, "मैं ईरान में सेल्स का काम करती थी
समीरा कहती हैं कि पहले उन्हें राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
वह बीबीसी पैनोरमा से कहती हैं, "मैं ईरान में सेल्स का काम करती थी
लेकिन जिस दिन ईरानी सुरक्षाबलों ने उनकी आंखों के सामने उनकी इकलौती बेटी को गोली मार दी, उस दिन सब कुछ बदल गया.
16 साल की सेवदा ईरान की सख़्त सरकार के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों में शामिल थीं
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
ये प्रदर्शन इस साल पूरे देश में फैल गए थे
इसके बाद अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए
इन हमलों में देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई मारे गए
समीरा कहती हैं कि बेटी की मौत का दुख बाद में ग़ुस्से में बदल गया
उनका आरोप है कि ईरानी अधिकारियों ने सेवदा का शव तलाशने में मदद करने के बजाय उनके रास्ते में रुकावटें खड़ी कीं