जेल अब गैंगस्टरों के लिए अपने आपराधिक साम्राज्य चलाने का एक सुरक्षित ठिकाना बन गई है, जहां से वे बड़े आराम से घटनाओं को अंजाम देते हैं। लॉरेंस बिश्नोई और अरुण गवली जैसे गैंगस्टरों के उदाहरण बताते हैं कि कैसे वे जेल के अंदर से काम होता है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- जेल अब गैंगस्टरों के लिए अपने आपराधिक साम्राज्य चलाने का एक सुरक्षित ठिकाना बन गई है, जहां से वे बड़े ...और पढ़ें
- जेल बन रही गैंगस्टरों के लिए सुरक्षित कमांड सेंटर।
- लॉरेंस बिश्नोई गैंग जेल से चला रहा आपराधिक गतिविधियां।
जेल बन रही गैंगस्टरों के लिए सुरक्षित कमांड सेंटर।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग जेल से चला रहा आपराधिक गतिविधियां।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जेल जिसके बारे में सोच कर ही एक आम इंसान परेशान हो जाता है कि आखिर उसके अंदर की दुनिया कैसी होगी। वहीं गैंगस्टरों के लिए ये सबसे मुफीद जगह बन रही है, जहां से वो अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।
1990 के दशक में जेल से गैंगस्टरों का व्यापारियों और आम लोगों पर निशाना बनाने का काम बड़ा आम रहा लेकिन वक्त के साथ इन चीजों पर लगाम लगी। टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के बाद से एक बार फिर ये सवाल घूमने लगा है कि आखिर जेल कैदियों को सजा देने के लिए है या फिर उन्हें काम करने के लिए बनी आरामदायक जगह।
हाल के कुछ मामलों पर गौर कर तो पता चलता है कि जेल से कैदी बड़े ही आराम से अपनी मनचाही घटनाओं को अंजाम देते रहे हैं। इस जगह पर रहने से वो अपने दुश्मन और अन्य लोगों के निशाने पर आने से भी सुरक्षित रहते हैं। कुल मिला कर ये उनके कमांड सेंटर की तरह काम करता है।
टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले में बिश्नोई गैंग की कथित भूमिका सामने आई है जबकि इस गैंग के मुखिया लॉरेंस बिश्नोई और उसका भाई अनमोल दोनों ही जेल में बंद हैं। अलग-अलग जेलों में बंद होने के बावूजद इनके नाम पर क्राइम हो रहे हैं। बीते तीन सालों में मुंबई में हुई कुछ बड़ी गोलीबारी की घटनाओं में इनकी संलिप्तता सामने आई हैं। लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है, जबकि उसका भाई अनमोल दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद है।
इससे पहले दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन और अबू सलेम विदेशों में बैठकर मुंबई में हमले के आदेश देते थे। वहीं अरुण गवली और अश्विन नाइक जैसे गैंगस्टर देश के अंदर जेलों से ही अपना गिरोह चलाते रहे।