थरूर का कहना है कि उपनिवेशवाद के जिक्र के बिना यह माफी अधूरी और अक्षम्य है, क्योंकि ब्रिटेन ने अपने औपनिवेशिक शासन के दौरान हुए शोषण के लिए कभी माफी नहीं मांगी।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- थरूर का कहना है कि उपनिवेशवाद के जिक्र के बिना यह माफी अधूरी और अक्षम्य है, क्योंकि ब्रिटेन ने अपने ...और पढ़ें
- थरूर ने ब्रिटिश पीएम बर्नहम की माफी पर सवाल उठाए।
- दास व्यापार पर माफी में उपनिवेशवाद का जिक्र नहीं।
थरूर ने ब्रिटिश पीएम बर्नहम की माफी पर सवाल उठाए।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
दास व्यापार पर माफी में उपनिवेशवाद का जिक्र नहीं।
ब्रिटेन ने औपनिवेशिक शोषण के लिए कभी माफी नहीं मांगी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की आलोचना की है। बर्नहम ने ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार में ब्रिटेन की भूमिका के लिए माफी मांगने पर विचार करने की बात कही है, लेकिन उन्होंने ब्रिटेन के औपनिवेशिक अतीत का कोई जिक्र नहीं किया।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने इस चूक को समझ में न आने वाली और अक्षम्य बताया है। उनका तर्क है कि ब्रिटेन को अपने औपनिवेशिक शासन के कारण हुए कष्टों को स्वीकार करना चाहिए।
थरूर ने यह टिप्पणी बर्नहम के उस एलान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार दास व्यापार में ब्रिटेन की भागीदारी के लिए औपचारिक माफी मांगने पर विचार करेगी। यह कदम अफ्रीकी और कैरेबियन देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है।
शनिवार को 'द गार्डियन' में छपे एक लेख में बर्नहम ने कहा कि कॉमनवेल्थ के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए ब्रिटेन को अपने जटिल इतिहास का सामना करना होगा। बर्नहम इस हफ्ते कॉमनवेल्थ नेताओं की बैठक के लिए एंटीगुआ और बारबुडा जाने वाले हैं।
शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में बर्नहम की टिप्पणी का जवाब देते हुए थरूर ने कहा कि उनका हमेशा से यह मानना रहा है कि ब्रिटिश शासन में हुए नुकसान को पैसों से तौलना मुश्किल है। लेकिन उपनिवेशवाद से हुई तबाही के लिए नैतिक प्रायश्चित बहुत जरूरी है।
मुझे यह जानकर खुशी हुई कि प्रधानमंत्री बर्नहम गुलामी के भयानक दौर के लिए ब्रिटिश सरकार की ओर से औपचारिक माफी मांगने को तैयार हैं। लेकिन उनकी माफी में उपनिवेशवाद का जिक्र न होना, समझ से परे और अक्षम्य है।