29वें वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने अपनी प्राथमिकताएं बताईं, जिनमें फाइटर स्क्वाड्रन क्षमता बहाल करना, तेजस और एएमसीए जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों में तेजी लाना शामिल है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- 29वें वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने अपनी प्राथमिकताएं बताईं, जिनमें फाइटर स्क्वाड्रन क्षमता बहाल करना, तेजस और एएमसीए जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों में तेजी लाना शामिल है।
- आशुतोष दीक्षित ने पेश किया IAF का भविष्य का खाका
- जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
आशुतोष दीक्षित ने पेश किया IAF का भविष्य का खाका
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के 29वें वायुसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने वाले एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने अपनी प्राथमिकताओं का स्पष्ट खाका खींच दिया है।
उन्होंने रविवार को कहा कि वायुसेना की स्वीकृत फाइटर स्क्वाड्रन क्षमता को बहाल करना, तेजस और एडवांस्ड मीडियम काम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों में तेजी लाना और तीनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
आसमान में अपनी ताकत को धार देने के लिए उन्होंने 'वायु' नाम से चार सूत्रीय विजन पेश किया है। इसके तहत सतर्कता और अभियानगत तैयारी, आत्मनिर्भरता, सामरिक नवाचार और तीनों सेनाओं में तालमेल पर विशेष जोर रहेगा। उन्होंने कहा कि हर स्क्वाड्रन, हर रडार, हर एयर डिफेंस यूनिट और साथ ही वायुसेना के हर एक योद्धा (एयर वॉरियर) को किसी भी पल कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।
साढ़े तीन हजार से अधिक घंटों की उड़ान का अनुभव रखने वाले एक कुशल फाइटर पायलट एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने स्पष्ट किया कि तेजस (एलसीए एमके 1ए और एमके 2) तथा एएमसीए कार्यक्रम के विकास को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ताकि ऑपरेशनल मांगों को पूरा किया जा सके।
रक्षा मंत्रालय ने पहले ही हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 180 हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए-एमके 1ए जेट) खरीदने के अनुबंध किए हैं।
रेस कोर्स एयरफोर्स स्टेशन पर औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि वायुसेना अपनी अभियानगत जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संख्या में साजो-सामान तैयार रखेगी। वर्तमान में वायुसेना की फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 30 रह गई है, जबकि इसकी आधिकारिक स्वीकृत संख्या 42 है। इस कमी को दूर कर ताकत को दोबारा पटरी पर लाना उनकी सबसे बड़ी चुनौती और पहली जिम्मेदारी है।
मौजूदा सुरक्षा माहौल को चुनौतीपूर्ण बताते हुए उन्होंने बदलते युद्ध स्वरूप - जैसे ड्रोन, लंबी दूरी के सटीक हथियार, अंतरिक्ष, साइबर, एआई और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम - से निपटने के लिए वायुसेना को तकनीकी रूप से सक्षम और तैयार रखने का संकल्प लिया।