मुंबई: आईएसआईएस आतंकी साजिश में शामिल था डॉक्टर, अदालत में कबूला जुर्म; छह साल की कठोर कारावास की मिली सजा ISIS module case Mumbai court sentences doctor adnanali sarkar to six years in jail after he pleads guilty
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- मुंबई: आईएसआईएस आतंकी साजिश में शामिल था डॉक्टर, अदालत में कबूला जुर्म; छह साल की कठोर कारावास की मिली सजा ISIS module case Mumbai court sentences doctor adnanali sarkar to six years in jail after he pleads guilty
जोगलेकर ने उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश रचने और सबूत मिटाने के अपराध में दोषी ठहराया। कोर्ट ने क्या टिप्पणी की? सरकार की ओर से अपराध स्वीकार करने की याचिका मंजूर करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि यह उसका पहला अपराध है, लेकिन उसके खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं। न्यायाधीश ने कहा, 'अदालत का मानना है कि समाज में एक कड़ा संदेश जाना चाहिए, ताकि इस तरह का कृत्य किसी भी रूप में समाज में दोबारा न हों। खासकर तब, जब ऐसे तत्वों की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ रही हो।' सरकार और मामले के अन्य आरोपियों को आईएसआईएस मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन को सक्रिय रूप से समर्थन देने का आरोप था। इस साल 25 जून में जब अदालत ने मामले में आरोप तय किए थे, तब सरकार ने खुद को निर्दोष बताया था। हालांकि, 28 अक्तूबर को उसने अदालत में एक आवेदन दाखिल कर अपराध स्वीकार करने की इच्छा जताई। साथ ही, मानवीय आधार पर कानून के तहत मिलने वाली न्यूनतम सजा देने का अनुरोध किया। याचिका में डॉक्टर ने क्या कहा? अपनी याचिका में सरकार ने बताया कि वह एक योग्य एनेस्थीसियोलॉजिस्ट है और गिरफ्तारी से पहले चिकित्सा का काम कर रहा था। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं था। याचिका के मुताबिक, सरकार अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके परिवार में बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और चार बच्चे हैं। उसकी गिरफ्तारी के बाद परिवार को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने उसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने और अपराध स्वीकार करने के कानूनी परिणामों को समझने के लिए सात दिन का समय दिया था। हालांकि, सरकार अपने फैसले पर कायम रहा और उसने दोहराया कि वह स्वेच्छा से अपराध स्वीकार करना चाहता है। अदालत ने रिकॉर्ड की जांच के बाद सुरक्षित रूप से निष्कर्ष निकाला कि सरकार ने किसी भी तरह के दबाव, जबरदस्ती, धमकी, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव के बिना अपराध स्वीकार किया है। इसके बाद अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार उसे दोषी ठहरा दिया। सरकार पर क्या है आरोप? अभियोजन पक्ष के अनुसार, सरकार और उसके सह-आरोपी आईएसआईएस के सदस्य थे। उन्होंने भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरे में डालने के इरादे से आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए आपराधिक साजिश रची थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी का आरोप था कि आरोपियों ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर समूह बनाए थे। इन समूहों के माध्यम से धार्मिक उपदेशों की आड़ में कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किए जाते थे। इनमें 'हिंसक और सशस्त्र जिहाद' तथा 'खिलाफत' से संबंधित विचारधारा शामिल थी। इसका उद्देश्य मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और उन्हें संगठन में भर्ती करना था।