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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

छोटी दिवाली पर क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा? जानें पौराणिक कथा, धार्मिक महत्व और लाभ

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: शुक्र, 6 नव॰ 2026, 07:36 pm
समाचार एजेंसी Amar Ujala
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छोटी दिवाली पर क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा? जानें पौराणिक कथा, धार्मिक महत्व और लाभ
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छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी पर हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली से एक दिन पहले बजरंगबली की आराधना क्यों की जाती है? जानें इसके पीछे की पौराणिक मान्यता, धार्मिक महत्व और पूजा से मिलने वाले लाभ।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • दीपावली से ठीक एक दिन पहले छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कृष्ण की पूजा के साथ हनुमान जी की आराधना का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली की रात बजरंगबली की पूजा करने से भक्तों को भय, संकट और नकारात्मकता से मुक्ति मिल सकती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर दिवाली से एक दिन पहले हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे कई धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक प्रसंग प्रचलित हैं। आइए जानते हैं छोटी दिवाली पर हनुमान पूजा का महत्व और इससे मिलने वाले लाभ। .metering_wall_container {min-height:58px;max-height:58px;position:relative;transition:max-height 0.5s ease-in-out;}
  • छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा का क्या धार्मिक महत्व है?
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटे थे, तब उनके स्वागत में दीपोत्सव मनाया गया था। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम हनुमान जी की निस्वार्थ सेवा, समर्पण और अटूट भक्ति से बेहद प्रसन्न थे। उन्होंने बजरंगबली को आशीर्वाद दिया था कि दीपावली के उत्सव से पहले उनकी पूजा की जाएगी। इसी मान्यता को छोटी दिवाली पर हनुमान जी की आराधना से जोड़कर देखा जाता है। एक अन्य धार्मिक मान्यता के मुताबिक, नरक चतुर्दशी की रात नकारात्मक शक्तियों से बचाव और भय से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जी की पूजा की जाती है। बजरंगबली को संकटमोचन कहा जाता है। ऐसे में भक्त इस दिन उनकी आराधना करके अपने जीवन से परेशानियों को दूर करने और परिवार की रक्षा की प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा, भारत के कुछ क्षेत्रों में छोटी दिवाली के दिन हनुमान जन्मोत्सव मनाने की भी परंपरा है। यही वजह है कि इन स्थानों पर नरक चतुर्दशी के अवसर पर हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा का क्या धार्मिक महत्व है?

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अयोध्या लौटे थे, तब उनके स्वागत में दीपोत्सव मनाया गया था। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम हनुमान जी की निस्वार्थ सेवा, समर्पण और अटूट भक्ति से बेहद प्रसन्न थे। उन्होंने बजरंगबली को आशीर्वाद दिया था कि दीपावली के उत्सव से पहले उनकी पूजा की जाएगी। इसी मान्यता को छोटी दिवाली पर हनुमान जी की आराधना से जोड़कर देखा जाता है। एक अन्य धार्मिक मान्यता के मुताबिक, नरक चतुर्दशी की रात नकारात्मक शक्तियों से बचाव और भय से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जी की पूजा की जाती है। बजरंगबली को संकटमोचन कहा जाता है। ऐसे में भक्त इस दिन उनकी आराधना करके अपने जीवन से परेशानियों को दूर करने और परिवार की रक्षा की प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा, भारत के कुछ क्षेत्रों में छोटी दिवाली के दिन हनुमान जन्मोत्सव मनाने की भी परंपरा है। यही वजह है कि इन स्थानों पर नरक चतुर्दशी के अवसर पर हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा करने से क्या लाभ मिलते हैं?

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

रिपोर्टिंग स्रोत: Amar Ujala मूल रिपोर्ट देखें

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