चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच मतभेद की ख़बरें सुर्खियों में आने के बाद से आयोग ने अपने पहले के कई नियमों में बदलाव किए हैं. विपक्ष इन बदलावों को आयोग का 'यू-टर्न' बता रहा है. आयोग ने किन नियमों में बदलाव किए हैं?
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने अपने पूर्व के फ़ैसलों पर दोबारा विचार करने की कड़ी में बुधवार को एक और बड़ा फ़ैसला करते हुए काम के बंटवारे के संबंध में आदेश जारी किया
- नए आदेश में महानिदेशक (आईटी) की निगरानी व्यवस्था को फिर से बहाल कर दिया गया है
- इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, निगरानी की यह व्यवस्था 28 जुलाई के एक आदेश से हटा दी गई थी
नए आदेश में महानिदेशक (आईटी) की निगरानी व्यवस्था को फिर से बहाल कर दिया गया है
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, निगरानी की यह व्यवस्था 28 जुलाई के एक आदेश से हटा दी गई थी
आयोग के ताज़ा आदेश में वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा को 'आईटी/आईसीटी' का प्रभार सौंपा गया और महानिदेशक (आईटी) के संबंध में कहा गया कि वो 'फ़ाइलें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त के माध्यम से आगे बढ़ाएंगी.'
हाल के दिनों में चुनाव आयोग ने अपने पूर्व के कई फ़ैसलों को वापस लिया है
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
ताज़ा फ़ैसले पर टीएमसी (ममता बनर्जी) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने शुक्रवार को एक्स पर लिखा, "ईसीआई को हर दिन अपने फैसले वापस लेने पड़ रहे हैं और सफाई देनी पड़ रही है, उसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट भी सवालों से बच नहीं सकता."
"पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग पर रोक क्यों नहीं लगाई? विद्वान न्यायाधीश ने ऐसा क्यों कहा कि "जो लोग इस बार वोट नहीं दे सकते, वे अगली बार वोट दे सकते हैं"? संवैधानिक अदालत होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने मतदान के संवैधानिक अधिकार को इतने हल्के ढंग से क्यों लिया?"
दरअसल 23 सितंबर को 'द इंडियन एक्सप्रेस' में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें दावा किया गया था कि पिछले साल अक्तूबर से इस साल अगस्त के बीच कम से कम 14 मौक़ों पर दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ईसीआईनेट और एसआईआर से जुड़े चुनाव आयोग के कई फ़ैसलों पर रिकॉर्ड में आपत्ति दर्ज कराई थी
इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया और उनके इस्तीफ़े की मांग करने लगे
इस रिपोर्ट के आने के बाद चुनाव आयोग की बैठक हुई