सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के बीच दशकों पुराने ऊर्जा विवाद को सुलझाया है। इसके तहत पंजाब और हरियाणा हिमाचल प्रदेश को 20 वर्षों में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देंगे।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के बीच दशकों पुराने ऊर्जा विवाद को सुलझाया है। इसके तहत पंजाब ...और पढ़ें
- सुप्रीम कोर्ट ने दशकों पुराना ऊर्जा विवाद सुलझाया।
- पंजाब, हरियाणा हिमाचल को देंगे 11,973 मिलियन यूनिट बिजली।
सुप्रीम कोर्ट ने दशकों पुराना ऊर्जा विवाद सुलझाया।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
पंजाब, हरियाणा हिमाचल को देंगे 11,973 मिलियन यूनिट बिजली।
यह भुगतान 20 वर्षों की अवधि में किया जाएगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के बीच दशकों से चले आ रहे उस ऊर्जा विवाद को खत्म कर दिया। ये विवाद1966 से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की परियोजनाओं से जुड़े बकाया भुगतान को लेकर था।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी
मोहना की पीठ ने केंद्र के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसके तहत पंजाब और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश को बकाया राशि का भुगतान बिजली (ऊर्जा) के रूप में करेंगे।
अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था 2011 के उस फैसले के अनुरूप होगी, जिसमें 1966 से भाखड़ा नांगल और ब्यास जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े बिजली के बकाये को हिमाचल प्रदेश के पक्ष में 7.19 प्रतिशत की दर से तय किया गया था। अदालत ने कहा कि पंजाब और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश को 20 वर्षों की अवधि में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देंगे।
पंजाब सरकार ने शुरू में केंद्र के उस प्रस्ताव का विरोध किया था जिसमें 15 वर्षों में ऊर्जा बकाया चुकाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में उसने इस योजना को 30 वर्षों में लागू करने का सुझाव दिया। वहीं, हिमाचल प्रदेश ने इसे 10 वर्षों के भीतर लागू करने की मांग की थी।
इस प्रस्ताव के तहत बांधों के निर्माण में आई पुरानी पूंजीगत लागत (कैपिटल कॉस्ट) के लिए 420 करोड़ रुपये का समायोजन (एडजस्टमेंट) किया गया है और अब हिमाचल प्रदेश को पंजाब या हरियाणा को कोई भुगतान नहीं करना होगा।