ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पशुपालन विभाग के साथ मिलकर चारे के संकट से दूध की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने की पहल की है। 'विकसित भारत-जी रामजी' योजना के तहत 22 नए कार्य जोड़कर चारा बैंक, चारागाह और पशुधन विकास को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
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- जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चारे के संकट के कारण दुग्ध उत्पादों की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के साथ मिलकर पहल की है।
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चारे के संकट के कारण दुग्ध उत्पादों की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग के साथ मिलकर पहल की है।
मनरेगा की जगह लाई गई योजना विकसित भारत-जी रामजी के तहत चारे की उपलब्धता बढ़ाकर देश में पशुधन विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए 22 तरह के अतिरिक्त कार्य शामिल किए गए हैं। गांवों में चारा बैंक और चारागाह भी बनाने की तैयारी है।
राज्यों को कुल खर्च का कम से कम पांच प्रतिशत चारा और पशुधन संबंधी कार्यों पर लगाने की अनुमति होगी।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
देश में चारा संकट बड़ी समस्या बनती जा रही है। इसके चलते पशुओं के रखरखाव पर खर्च बढ़ रहा है और उनके दूध उत्पादन की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। इसी आधार पर अमूल ने अपने दुग्ध उत्पादों की कीमत बढ़ा दी है। कर्नाटक में दूध के दाम में एकबारगी आठ रुपये प्रतिकिलो की वृद्धि हुई है।
नई व्यवस्था में व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर चारा उत्पादन के साथ चारागाह और चराई भूमि विकसित की जा सकेगी। पेड़ों के साथ घास उगाने वाली प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए भंडारण केंद्र और साइलेज इकाइयां बनाई जा सकेंगी।
रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से चारा बैंक, सामुदायिक चारागाह, चराई भूमि, पशु आश्रय स्थल और चिकित्सा केंद्र बनाए जा सकेंगे। भंडारण की व्यवस्था भी होगी।
ग्रामीण विकास विभाग और पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सूचित कर दिया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ना है, जिनका सीधा लाभ किसानों और पशुपालकों को मिल सके। छोटे किसानों तथा भूमिहीन परिवारों को इसका लाभ पहुंचाने पर जोर है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका पशुपालन और डेयरी पर निर्भर है।
इसके अलावा गाय-बैल, बकरी, सूअर और मुर्गी पालन के लिए नए आश्रय स्थल बनाने तथा पुराने आश्रय स्थलों की मरम्मत और रखरखाव का काम भी कराया जा सकेगा। सामुदायिक दूध संग्रह केंद्र, पशु चिकित्सा स्वास्थ्य केंद्र और पशुओं के लिए पानी की टंकियां बनाने की भी अनुमति होगी।