केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले यूजीसी समता नियम 2026 की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित कर रही है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले यूजीसी समता ...और पढ़ें
- यूजीसी समता नियम 2026 की समीक्षा के लिए सरकार गठित करेगी नई समिति
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यूजीसी समता नियम 2026 की समीक्षा के लिए सरकार गठित करेगी नई समिति
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) समता नियम 2026 की दोबारा समीक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित कर रही है।
गुरुवार को सीजेआई सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यूजीसी समता नियम 2026 का मामला सुनवाई पर लगा था।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि छात्रों की चिंताओं का समाधान कैसे किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि नियामक ढांचे के तहत छात्र समुदाय का कोई भी वर्ग खुद को उपेक्षित, खतरे में या आशंकित महसूस न करे।
मेहता ने कहा कि सरकार एक समिति नियुक्ति करने पर विचार कर रही है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यूजीसी ने विचार विमर्श कर जनवरी 2026 में समता नियम अधिसूचित किये थे। इन नियमों ने 2012 के नियमों का स्थान लिया था। जिसमें एससी एसटी के साथ ओबीसी को भी जोड़ा गया था। नए नियमों के खिलाफ सामान्य वर्गों में नाराजगी थी और इसे भेदभाव वाला नियम बताया गया था क्योंकि इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए प्रताड़ना से बचने का नियम नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट का भी ऐसा ही मानना था और उसके बाद इसपर रोक लगा दी थी। अदालत ने प्रथमदृष्टया इन्हें अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाला बताया था। साथ ही निर्देश दिया था कि अंतरिम अवधि में 2012 के नियम लागू रहेंगे।
वैसे यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है। इसीलिए सभी दलों में चुप्पी थी। विपक्ष को यह आशा थी और भाजपा को आशंका कि इसके कारण भाजपा को नुकसान होगा। ऐसे में समिति का गठन होने के बाद भी उस पर नजर रहेगी।