सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर छात्र विरोध-प्रदर्शन हिंसा की जांच कर रही उच्च स्तरीय समिति को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय दिया है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर छात्र विरोध-प्रदर्शन हिंसा की जांच कर रही उच्च स्तरीय समिति को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय दिया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति को एक माह का समय दिया।
- सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति को एक माह का समय दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति को एक माह का समय दिया।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति को एक माह का समय दिया।
जंतर-मंतर हिंसा जांच में कम शिकायतें और साक्ष्य मिले।
समिति को सभी लंबित याचिकाएं और सबूत सौंपे जाएंगे।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा की जांच के लिए गठित हाई पावर्ड इंक्वायरी कमिटी को प्रभावित लोगों की तरफ से बहुत कम शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
पर्याप्त जानकारी और साक्ष्यों के अभाव के चलते समिति अब तक किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। इसे देखते हुए शीर्ष अदालत ने समिति को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक महीने की अतिरिक्त मोहलत दी है।
चीफ जस्टिस और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि जंतर-मंतर हिंसा से संबंधित सभी लंबित याचिकाएं, वीडियो फुटेज और शिकायतें सीधे जांच समिति को सौंपी जाएं ताकि जांच को गति मिल सके।
छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इस हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर
समिति के अन्य सदस्यों में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायधीश शलिंदर कौर, CBI के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त DGP एल.आर