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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

रामायण: अगरबत्ती से बनता था कोहरा, रूई से बादल.. एक युद्ध सीन पर लगे साढ़े छह साल; वीएफएक्स की अनसुनी कहानी

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: बुध, 4 नव॰ 2026, 09:52 pm
समाचार एजेंसी Amar Ujala
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रामायण: अगरबत्ती से बनता था कोहरा, रूई से बादल.. एक युद्ध सीन पर लगे साढ़े छह साल; वीएफएक्स की अनसुनी कहानी
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1987 में रामानंद सागर की रामायण में रूई से बादल बनाए जाते थे। अब नमित मल्होत्रा की रामायण में हजारों लोग वीएफएक्स पर काम कर रहे हैं। एक युद्ध सीन तैयार करने में साढ़े छह साल लगे। जानिए चार दशक में रामायण को पर्दे पर दिखाने की तकनीक कितनी बदल गई।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • 1987 में रामानंद सागर की रामायण में रूई से बादल बनाए जाते थे। अब नमित मल्होत्रा की रामायण में हजारों लोग वीएफएक्स पर काम कर रहे हैं। एक युद्ध सीन तैयार करने में साढ़े छह साल लगे। जानिए चार दशक में रामायण को पर्दे पर दिखाने की तकनीक कितनी बदल गई।

मामले की विस्तृत जानकारी

TaazaWire Special Desk: रामायण: अगरबत्ती से बनता था कोहरा, रूई से बादल.. एक युद्ध सीन पर लगे साढ़े छह साल; वीएफएक्स की अनसुनी कहानी को लेकर सामने आई इस बड़ी जानकारी पर संबंधित विभाग, विश्लेषक और अधिकारी लगातार नज़र बनाए हुए हैं। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार इस विषय में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं जो आम जनता और पाठकों के लिए सीधे तौर पर प्रासंगिक हैं।

1987 में रामानंद सागर की रामायण में रूई से बादल बनाए जाते थे। अब नमित मल्होत्रा की रामायण में हजारों लोग वीएफएक्स पर काम कर रहे हैं। एक युद्ध सीन तैयार करने में साढ़े छह साल लगे। जानिए चार दशक में रामायण को पर्दे पर दिखाने की तकनीक कितनी बदल गई। इस विषय को लेकर विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इसके प्रभाव व्यापक रूप से देखने को मिल सकते हैं। संबंधित पक्ष लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।

आगे क्या होगा और इसका क्या असर पड़ेगा?

सूत्रों और आधिकारिक जानकारों के अनुसार आने वाले दिनों में इस पर विस्तृत दिशा-निर्देश या नए निर्णय की घोषणा संभव है। नागरिकों और पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक सूचनाओं और TaazaWire की ताज़ा रिपोर्टिंग के साथ जुड़े रहें।

रिपोर्टिंग स्रोत: Amar Ujala मूल रिपोर्ट देखें

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