इस लेख में जानें कि त्योहारों के दौरान जरूरत से ज्यादा मिठाई और चीनी का सेवन आपकी सेहत को किस तरह नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- Side Effects of Eating Too Much Sugar: त्योहारों की रौनक मिठाइयों, चॉकलेट्स, स्वादिष्ट पकवानों और मीठे ड्रिंक्स के बिना अधूरी मानी जाती है। कभी-कभार स्वाद के लिए थोड़ी मात्रा में मीठा खाने से शरीर को खास नुकसान नहीं पहुंचता, लेकिन अक्सर फेस्टिव सीजन में लोग अनजाने में अत्यधिक चीनी का सेवन कर बैठते हैं। यह लापरवाही वजन बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर के अंदरूनी अंगों को गंभीर और स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। मेडिकल ऑन्कोलॉजी के जाने-माने विशेषज्ञ और निदेशक डॉ
- अमीश वोरा के अनुसार, डाइट में जरूरत से ज्यादा एडेड शुगर मेटाबॉलिज्म की पूरी प्रक्रिया को बाधित कर देती है। इसका सबसे बुरा असर हमारे लिवर, गट हेल्थ (आंतों के माइक्रोब्स) और शरीर की कोशिकाओं की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। त्योहारों का आनंद तभी सुरक्षित है जब हम स्वाद के साथ अपनी सेहत का भी पूरा संतुलन बनाए रखें। आइए इस बारे में जानते हैं डिटेल में। लिवर पर बढ़ता है फैटी लिवर का खतरा डॉ
- अमीश वोरा ने स्पष्ट किया कि मीठे पेयों और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाली फ्रुक्टोज युक्त चीनी सीधे लिवर को प्रभावित करती है। लिवर अतिरिक्त चीनी को फैट में बदलने लगता है, जिससे कोशिकाओं में चर्बी जमने लगती है। यह स्थिति मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) का रूप ले लेती है, जिसे आम भाषा में फैटी लिवर कहा जाता है। जो लोग पहले से मोटापे, डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस से जूझ रहे हैं, उनमें यह जोखिम काफी तेजी से बढ़ता है। आंतों (गट हेल्थ) का संतुलन बिगड़ना मानव आंत में खरबों लाभकारी बैक्टीरिया (माइक्रोब्स) मौजूद होते हैं, जो पाचन तंत्र, इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को सुचारू रखते हैं। अधिक चीनी और कम फाइबर वाली डाइट इन गुड बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ देती है। इसके परिणामस्वरूप पाचन संबंधी समस्याएं जैसे पेट फूलना (ब्लोटिंग), गैस, एसिडिटी और कब्ज की शिकायत शुरू हो जाती है। डॉ
अमीश वोरा के अनुसार, डाइट में जरूरत से ज्यादा एडेड शुगर मेटाबॉलिज्म की पूरी प्रक्रिया को बाधित कर देती है। इसका सबसे बुरा असर हमारे लिवर, गट हेल्थ (आंतों के माइक्रोब्स) और शरीर की कोशिकाओं की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। त्योहारों का आनंद तभी सुरक्षित है जब हम स्वाद के साथ अपनी सेहत का भी पूरा संतुलन बनाए रखें। आइए इस बारे में जानते हैं डिटेल में। लिवर पर बढ़ता है फैटी लिवर का खतरा डॉ
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
अमीश वोरा ने स्पष्ट किया कि मीठे पेयों और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाली फ्रुक्टोज युक्त चीनी सीधे लिवर को प्रभावित करती है। लिवर अतिरिक्त चीनी को फैट में बदलने लगता है, जिससे कोशिकाओं में चर्बी जमने लगती है। यह स्थिति मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) का रूप ले लेती है, जिसे आम भाषा में फैटी लिवर कहा जाता है। जो लोग पहले से मोटापे, डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस से जूझ रहे हैं, उनमें यह जोखिम काफी तेजी से बढ़ता है। आंतों (गट हेल्थ) का संतुलन बिगड़ना मानव आंत में खरबों लाभकारी बैक्टीरिया (माइक्रोब्स) मौजूद होते हैं, जो पाचन तंत्र, इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को सुचारू रखते हैं। अधिक चीनी और कम फाइबर वाली डाइट इन गुड बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ देती है। इसके परिणामस्वरूप पाचन संबंधी समस्याएं जैसे पेट फूलना (ब्लोटिंग), गैस, एसिडिटी और कब्ज की शिकायत शुरू हो जाती है। डॉ
अमीश वोरा का सुझाव है कि त्योहारों में मिठाइयों के साथ फल, कच्ची सब्जियां और साबुत अनाज जैसे फाइबर युक्त विकल्प जरूर शामिल करें। कोशिकाओं पर असर: इंसुलिन रेजिस्टेंस और सूजन लगातार अधिक मात्रा में चीनी लेने से शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन के प्रति असंवेदनशील होने लगती हैं, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इसके साथ ही शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और अंदरूनी सूजन (क्रॉनिक इंफ्लेमेशन) बढ़ने लगती है। इस कारण कोशिकाएं ग्लूकोज को ऊर्जा में नहीं बदल पातीं, जिससे टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ ब्लड शुगर स्तर धीरे-धीरे नसों और रक्त वाहिकाओं को भी कमजोर करता है। कैंसर का अप्रत्यक्ष जोखिम अक्सर पूछे जाने वाले सवाल पर डॉ
अमीश वोरा ने बताया कि चीनी सीधे तौर पर कैंसर पैदा नहीं करती, लेकिन लंबे समय तक इसका अत्यधिक सेवन मोटापे, पुरानी सूजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देता है। ये तीनों कारक कोलोरेक्टल, ब्रेस्ट और लिवर कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। ऐसे में संतुलित खान-पान अपनाकर इन गंभीर खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है। त्योहारों में बचाव और सावधानी के उपाय: पोर्शन कंट्रोल: मिठाइयों को दिनभर में केवल सीमित मात्रा में लें, एक साथ अधिक खाने से बचें। घर की बनी मिठाइयां: बाजार की मिलावटी और अधिक चाशनी वाली मिठाइयों की जगह घर पर बनी कम मीठी चीजें चुनें। हाइड्रेशन और वॉक: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और रोजाना कम से कम 20-30 मिनट की सैर जरूर करें। मरीजों के लिए सलाह डॉ
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
अमीश वोरा के अनुसार, डायबिटीज और फैटी लिवर के मरीज त्योहारों के दौरान अपनी डाइट को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतें। ------------------------------------ नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है। अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।