Diwali Air Pollution: दिवाली पास आते ही पटाखे चलना शुरू कर देते हैं। ऐसे में पटाखों के धुएं से बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी हो जाता है। आइए इसके लिए कुछ टिप्स आपको देते हैं।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- Diwali Air Pollution: दिवाली का पावन पर्व जहां खुशियां और रोशनी लेकर आता है, वहीं पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं हवा को बेहद खतरनाक बना देता है। इसमें मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और सूक्ष्म कण (PM 2.5 व PM 10) श्वसन तंत्र को सीधे नुकसान पहुंचाते हैं। यह जहरीली हवा खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा करती है। बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और गर्भवती महिलाओं के रक्तप्रवाह में टॉक्सिन्स पहुंचने से गर्भस्थ शिशु पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे में त्योहार के दौरान थोड़ी सी सतर्कता और उचित सावधानियां अपनाकर इस जहरीले धुएं के दुष्प्रभावों से अपने पूरे परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है। पटाखों के धुएं से बचाव के विशेष उपाय 1
- बच्चों के लिए सुरक्षा सावधानियां घर के भीतर रखें: शाम और रात के समय जब आतिशबाजी चरम पर हो, बच्चों को बाहर न जाने दें। सुबह की स्मॉग के समय भी आउटडोर खेलकूद से रोकें। मास्क का प्रयोग: यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो साधारण कपड़े के मास्क की बजाय अच्छी फिटिंग वाला N95 या प्रमाणित एंटी-पॉल्यूशन मास्क पहनाएं। हाइड्रेशन और खानपान: बच्चों को पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी, सूप और ताजे फलों का रस दें, जिससे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें। आंखों और त्वचा की देखभाल: बाहर से आने के बाद बच्चों के चेहरे और आंखों को साफ ठंडे पानी से धुलवाएं ताकि जलन न हो। 2
- बुजुर्गों के लिए जरूरी कदम दवाएं और इनहेलर तैयार रखें: अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सीओपीडी (COPD) से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों के इनहेलर, नेबुलाइजर और जरूरी दवाएं पहले से पास रखें। मॉर्निंग वॉक के समय में बदलाव: दिवाली के अगले 3-4 दिनों तक सुबह-सुबह टहलने जाने से बचें, क्योंकि सुबह के वक्त प्रदूषण कण जमीन की सतह के करीब जमे होते हैं। ऑक्सीजन लेवल की निगरानी: घर में पल्स ऑक्सीमीटर रखें और सांस फूलने या बेचैनी होने पर तुरंत ऑक्सीजन स्तर जांचें और डॉक्टर से परामर्श लें। हल्की भाप और काढ़ा: गले की खराश और सीने में जकड़न से राहत के लिए रात को सोने से पहले सादे पानी की भाप और तुलसी-अदरक का काढ़ा लाभदायक होता है। 3
बच्चों के लिए सुरक्षा सावधानियां घर के भीतर रखें: शाम और रात के समय जब आतिशबाजी चरम पर हो, बच्चों को बाहर न जाने दें। सुबह की स्मॉग के समय भी आउटडोर खेलकूद से रोकें। मास्क का प्रयोग: यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो साधारण कपड़े के मास्क की बजाय अच्छी फिटिंग वाला N95 या प्रमाणित एंटी-पॉल्यूशन मास्क पहनाएं। हाइड्रेशन और खानपान: बच्चों को पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी, सूप और ताजे फलों का रस दें, जिससे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें। आंखों और त्वचा की देखभाल: बाहर से आने के बाद बच्चों के चेहरे और आंखों को साफ ठंडे पानी से धुलवाएं ताकि जलन न हो। 2
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
बुजुर्गों के लिए जरूरी कदम दवाएं और इनहेलर तैयार रखें: अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सीओपीडी (COPD) से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों के इनहेलर, नेबुलाइजर और जरूरी दवाएं पहले से पास रखें। मॉर्निंग वॉक के समय में बदलाव: दिवाली के अगले 3-4 दिनों तक सुबह-सुबह टहलने जाने से बचें, क्योंकि सुबह के वक्त प्रदूषण कण जमीन की सतह के करीब जमे होते हैं। ऑक्सीजन लेवल की निगरानी: घर में पल्स ऑक्सीमीटर रखें और सांस फूलने या बेचैनी होने पर तुरंत ऑक्सीजन स्तर जांचें और डॉक्टर से परामर्श लें। हल्की भाप और काढ़ा: गले की खराश और सीने में जकड़न से राहत के लिए रात को सोने से पहले सादे पानी की भाप और तुलसी-अदरक का काढ़ा लाभदायक होता है। 3
गर्भवती महिलाओं के लिए एहतियात सीधे संपर्क से बचें: पटाखों के धुएं से पूरी तरह दूर रहें, क्योंकि इसमें मौजूद भारी धातुएं (जैसे लेड और बेरियम) गर्भस्थ शिशु के विकास को प्रभावित कर सकती हैं। कमरे बंद रखें और प्यूरीफायर चलाएं: खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें। यदि उपलब्ध हो, तो कमरे में HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर ऑन रखें। तनाव और तेज आवाज से बचाव: पटाखों का अत्यधिक शोर रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ा सकता है। शांत कमरे में रहें और जरूरत पड़ने पर ईयरप्लग का प्रयोग करें। एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार: डाइट में विटामिन-सी, हरी पत्तेदार सब्जियां और नट्स शामिल करें ताकि प्रदूषण से होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम किया जा सके। ------------- नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है। अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।