विपक्षी गठबंधन 'वोट चोरी' का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहा है, लेकिन बीजेपी का कहना है विपक्ष के आरोप बेबुनियाद हैं और वह संसद में बहस से बच रहा है.
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- दिल्ली में इंडिया गठबंधन के नेताओं और समर्थकों की रविवार को रामलीला मैदान में महारैली हुई
- विशेष बात ये रही कि पिछले कुछ समय से जिस तरह से प्रदर्शनकारियों का पुलिस से टकराव दिख रहा था, वो नज़ारे महारैली में नहीं दिखे
- दूसरी ओर, बीजेपी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने एक नवंबर को यह रैली निकालने के लिए इंडिया गठबंधन विशेषकर कांग्रेस पर निशाना साधा
विशेष बात ये रही कि पिछले कुछ समय से जिस तरह से प्रदर्शनकारियों का पुलिस से टकराव दिख रहा था, वो नज़ारे महारैली में नहीं दिखे
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
दूसरी ओर, बीजेपी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने एक नवंबर को यह रैली निकालने के लिए इंडिया गठबंधन विशेषकर कांग्रेस पर निशाना साधा
साथ ही, इस दिन दिल्ली, पंजाब, हरियाणा में अलग-अलग कार्यक्रम करके बीजेपी ने इस तारीख़ के इतिहास को 1984 के सिख विरोधी दंगों की शुरुआत से जोड़ा
चार दशक से पत्रकारिता कर रहीं राजनीतिक टिप्पणीकार नीरजा चौधरी के अनुसार, बीजेपी ने विपक्ष की रैली को रोकने की कोशिश नहीं की, जबकि ऐसी आशंका थी कि प्रदर्शनकारियों को सीमाओं पर रोका जा सकता था
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
वे इसे संकेत मानती हैं कि केंद्र सरकार ने टकराव से बचते हुए अब राजनीतिक स्तर पर जवाब देने का रास्ता चुना है
पहले सरकार इन प्रदर्शनों को 'लॉ एंड ऑर्डर' की रणनीति से संभालने की कोशिश कर रही थी, जिसके चलते उसे अक्तूबर में हुईं पुलिस कार्रवाइयों के लिए काफ़ी आलोचना भी झेलनी पड़ी थी
वरिष्ठ पत्रकार स्मिता गुप्ता का मानना है कि एक नवंबर को सिख दंगों से जोड़कर इंडिया गठबंधन की रैली की आलोचना करना बीजेपी का पूरी तरह से राजनीतिक आरोप है
उन्होंने बीबीसी से कहा, "बीजेपी चुनावों को लेकर फोकस्ड पार्टी रही है, पंजाब में चुनाव हैं इसलिए उन्होंने एक नवंबर को उस घटना से जोड़ दिया
इस आधार पर रैली की आचोलना करने का कोई मतलब नहीं निकलता है."