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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

पेरेंटिंग टिप्स: सोने से पहले बच्चों को जरूर सुनाएं कहानी, मिल सकते हैं ये 5 बड़े फायदे

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: सोम, 2 नव॰ 2026, 12:20 am
समाचार एजेंसी Amar Ujala
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पेरेंटिंग टिप्स: सोने से पहले बच्चों को जरूर सुनाएं कहानी, मिल सकते हैं ये 5 बड़े फायदे
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Why Storytelling Is Important for Kids: मोबाइल और रील्स के दौर में बच्चों को कहानियां सुनाना क्यों जरूरी है? जानिए कैसे स्टोरी टेलिंग से बच्चों की कल्पनाशक्ति, भावनात्मक समझ और व्यक्तित्व का विकास होता है।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • Benefits Of Storytelling : एक समय ऐसा भी था, जब रात होते ही नानी-दादी की कहानियों की महफिल सज जाती थी। कभी राजा-रानी के किस्से, तो कभी चींटी और टिड्डे की कहानी बच्चों की कल्पनाओं को नई उड़ान देती थी। आज वही बचपन मोबाइल स्क्रीन, रील्स और शॉर्ट्स के बीच सिमटता जा रहा है। ऐसे में बदलते दौर में बच्चों को कहानियों से जोड़ना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कहानियां न केवल बच्चों का मनोरंजन करती हैं, बल्कि उन्हें दूसरों की भावनाएं समझना, सही-गलत में फर्क करना और मुश्किलों का सामना करना भी सिखाती हैं। ऐसे में आप भी कहानियों के माध्यम से बच्चों सीख दे सकती हैं और उनके व्यक्तित्व को निखार सकती हैं।
  • जब बच्चे कहानियां सुनते या पढ़ते हैं, तो उनके दिमाग के ‘मिरर न्यूरॉन्स’ एक्टिव हो जाते हैं। अगर कहानी का पात्र किसी मुसीबत में किसी की मदद करता है, तो बच्चा उस के लिए सहानुभूति भाव को खुद महसूस करता है। बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, कहानियां सीधे दिमाग के इमोशनल सेंटर से जुड़ती हैं। यही कारण है कि उपदेश देने के बजाय कहानी के माध्यम से सिखाई गई बातें बच्चे के दिमाग में जीवन भर के लिए छप जाती हैं।
  • आज बच्चों को मोबाइल से दूर करना माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती है। अगर बच्चा किताबें पढ़ने में नखरे दिखाता है, तो स्क्रीन से दूरी बनाने के लिए स्मार्ट तकनीक का सहारा लें। आजकल ऐसे कई एआई-पावर्ड किड्स ऑडियोबुक्स और इंटरेक्टिव स्टोरी एप्स आ गए हैं, जो बच्चे की उम्र और रुचि के हिसाब से कहानियां सुनाते हैं। इनमें 3डी सराउंड साउंड का इस्तेमाल होता है, जिससे बच्चे का ध्यान भटकता नहीं है। असल में स्क्रीन देखने के बजाय अच्छी ऑडियो बुक्स सुनने से भी बच्चों की कल्पना शक्ति और एकाग्रता तेजी से बढ़ती है।

जब बच्चे कहानियां सुनते या पढ़ते हैं, तो उनके दिमाग के ‘मिरर न्यूरॉन्स’ एक्टिव हो जाते हैं। अगर कहानी का पात्र किसी मुसीबत में किसी की मदद करता है, तो बच्चा उस के लिए सहानुभूति भाव को खुद महसूस करता है। बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, कहानियां सीधे दिमाग के इमोशनल सेंटर से जुड़ती हैं। यही कारण है कि उपदेश देने के बजाय कहानी के माध्यम से सिखाई गई बातें बच्चे के दिमाग में जीवन भर के लिए छप जाती हैं।

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

आज बच्चों को मोबाइल से दूर करना माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती है। अगर बच्चा किताबें पढ़ने में नखरे दिखाता है, तो स्क्रीन से दूरी बनाने के लिए स्मार्ट तकनीक का सहारा लें। आजकल ऐसे कई एआई-पावर्ड किड्स ऑडियोबुक्स और इंटरेक्टिव स्टोरी एप्स आ गए हैं, जो बच्चे की उम्र और रुचि के हिसाब से कहानियां सुनाते हैं। इनमें 3डी सराउंड साउंड का इस्तेमाल होता है, जिससे बच्चे का ध्यान भटकता नहीं है। असल में स्क्रीन देखने के बजाय अच्छी ऑडियो बुक्स सुनने से भी बच्चों की कल्पना शक्ति और एकाग्रता तेजी से बढ़ती है।

बच्चों का मन कोरी स्लेट की तरह होता है, जिस पर हर अनुभव अपनी छाप छोड़ता है। कहानियां उनकी भावनात्मक समझ बढ़ाती हैं। इसलिए कहानी खत्म होने के बाद बच्चे से कहें, ‘अगर तुम उस जगह होते, तो क्या करते?’ इसे इमोशनल विजुअलाइजेशन कहते हैं।

ऐसे सवाल बच्चों को दूसरों के नजरिए से सोचने और अपनी भावनाओं को पहचानने का अवसर देते हैं। वे समझने लगते हैं कि हर परिस्थिति में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं और किसी फैसले का असर दूसरों पर भी पड़ता है। इससे उनकी भावनात्मक समझ, निर्णय लेने की क्षमता और समस्या सुलझाने के कौशल को बढ़ावा मिल सकता है। ध्यान रखें, उनके जवाब गलत होने पर तुरंत टोकने के बजाय प्यार से बातचीत करें।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

आजकल का नया ट्रेंड है, बच्चे को कहानी का हीरो बनाकर सुनाना। यह बच्चों को कहानियों से जोड़ने का एक मजेदार तरीका है उन्हें कहानी का मुख्य पात्र बनाना। उदाहरण के लिए, ‘एक था आरव, जो एक दिन जंगल में खोए हुए खरगोश की मदद करने निकला।’ यहां आरव की जगह अपने बच्चे का नाम जोड़ दें और कहानी में उसकी पसंद के पात्र शामिल करें।

नेहा बताती हैं कि कहानियां बच्चों के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और नैतिक विकास का प्रभावी माध्यम हैं। इनके जरिये बच्चे सही-गलत की पहचान, भावनाओं पर नियंत्रण और समस्या समाधान सीखते हैं। करुणा, क्षमा और सहयोग आधारित कहानियां उनमें सहानुभूति विकसित करती हैं। इसलिए आप बच्चों को केवल कहानियां न सुनाएं, बल्कि बाद में उस कहानी पर चर्चा भी करें, ताकि वे सीखे गए मूल्यों को व्यवहार में उतार सकें।

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रिपोर्टिंग स्रोत: Amar Ujala मूल रिपोर्ट देखें

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