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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

गिरमिटिया से ग्लोबल लीडर तक: विदेशों में कैसे लिखी जा रही है भारतीय मूल के नेताओं की राजनीतिक कहानी?

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: सोम, 2 नव॰ 2026, 01:38 pm
समाचार एजेंसी Dainik Jagran
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संघर्ष से सफलता का सफर तय कर सात समंदर पार आज भारतवंशियों ने दुनिया की महाशक्तियों के सत्ता गलियारों में अद्भुत राजनीतिक धाक जमाई है। आइए उनके बारे में जानते हैं।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • संघर्ष से सफलता का सफर तय कर सात समंदर पार आज भारतवंशियों ने दुनिया की महाशक्तियों के सत्ता गलियारों में ...और पढ़ें
  • भारतवंशी 15 से अधिक देशों में 200 से ज्यादा महत्वपूर्ण पदों पर।
  • ऋषि सुनक, कमला हैरिस जैसे नेता शीर्ष पदों पर आसीन।

भारतवंशी 15 से अधिक देशों में 200 से ज्यादा महत्वपूर्ण पदों पर।

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

ऋषि सुनक, कमला हैरिस जैसे नेता शीर्ष पदों पर आसीन।

दादाभाई नौरोजी ब्रिटिश संसद में पहले भारतीय सांसद बने।

शुभम कुमार, नई दिल्ली। औपनिवेशिक काल के दौर में जिन भारतीयों को गिरमिटिया मजदूर बनाकर या मामूली प्रवासियों के रूप में सात समंदर पार भेजा गया था, आज उन्हीं के वंशजों ने दुनिया के ताकतवर देशों की सत्ता के गलियारों में ऐसी धाक जमाई है कि बड़े-बड़े राजनीतिक दिग्गज भी हैरान हैं।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने से लेकर अमेरिका, कनाडा, मॉरीशस, गुयाना, पुर्तगाल और सूरीनाम जैसे देशों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्री पद तक का सफर तय करने वाले भारतवंशियों का यह इतिहास संघर्ष, योग्यता और सफलता की एक अद्भुत कहानी है।

ऐसे में अब सवाल यह है कि अबतक दुनियाभर के कितने देशों में भारतवंशियों ने चुनाव लड़े? विदेश में चुनाव लड़ने वाले इतिहास के सबसे पहले व्यक्ति कौन थे?अब तक कौन जीता और कौन हारा? और सबसे बड़ा सवाल विदेशी धरती पर चुनाव लड़ने के लिए क्या कानूनी योग्यताएं जरूरी होती हैं?

एक रिपोर्ट के अनुसार, आज के समय में दुनिया के 15 से अधिक देशों में 200 से ज्यादा भारतवंशी महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी और विधायी पदों पर हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, गुयाना, मॉरीशस और त्रिनिदाद एवं टोबैगो जैसे देशों में भारतीय मूल के राजनेताओं ने सांसद (MP) से लेकर राष्ट्र प्रमुख तक का सफर तय किया है।

चार साल पहले की बात है, ब्रिटेन में अक्टूबर 2022 में ऋषि सुनक ने इतिहास रचते हुए वहां के पहले हिंदू और भारतीय मूल के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला था। उनके अलावा प्रीति पटेल, सुएला ब्रेवरमैन और कई अन्य सांसद ब्रिटिश संसद में मजबूत पकड़ रखते हैं।

बात अब गुयाना की करें तो, वहां के वर्तमान राष्ट्रपति इरफान अली और उपराष्ट्रपति भरत जगदेव दोनों भारतीय मूल के हैं। वहीं, सूरीनाम में 2020 से लेकर 2025 तक राष्ट्रपति रहने वाले चंद्रिकाप्रसाद संतोखी भी भारतीय वंशज है।

रिपोर्टिंग स्रोत: Dainik Jagran मूल रिपोर्ट देखें

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