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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

निर्मला सीतारमण: पूंजीगत व्यय, एआई और बैंकिंग सुधारों पर क्या रोडमैप? वित्त मंत्री ने बताई प्राथमिकता

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: रवि, 1 नव॰ 2026, 11:33 pm
समाचार एजेंसी Amar Ujala
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निर्मला सीतारमण: पूंजीगत व्यय, एआई और बैंकिंग सुधारों पर क्या रोडमैप? वित्त मंत्री ने बताई प्राथमिकता
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय अनुशासन के संतुलन पर जोर देते हुए पूंजीगत व्यय, एआई प्रशिक्षण और 2047 तक शत-प्रतिशत बीमा कवरेज का रोडमैप पेश किया है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए अभी क्लिक करें।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • देश की आर्थिक वृद्धि की गति को बनाए रखने और वित्तीय संतुलन साधने के बीच केंद्र सरकार ने पूंजीगत व्यय को अपनी प्राथमिकता घोषित किया है। सोमवार को एचएसबीसी इंडिया के तीसरे वार्षिक वित्तीय समावेशन सम्मेलन में एचएसबीसी इंडिया के सीईओ हितेंद्र दवे के साथ बातचीत के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि आर्थिक विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं का समर्थन करते हुए भी सार्वजनिक व्यय को जिम्मेदार और नियंत्रित रखा जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि जब तक निजी क्षेत्र अपनी क्षमता विस्तार या नई इकाइयां स्थापित करने के लिए आगे नहीं आता, तब तक सरकार पूंजीगत व्यय के जरिए विकास को गति देती रहेगी।
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, पिछले चार से पांच वर्षों में पूंजीगत व्यय ने अपने 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' के माध्यम से उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं, इसलिए यह सरकार की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वृद्धि को बनाए रखने के साथ-साथ राजकोषीय घाटे पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा, "हमें राजकोषीय रूप से विवेकपूर्ण होने की आवश्यकता है; अन्यथा यह लाभ की स्थिति नहीं होगी"। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजकोषीय अनुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी और खर्च रचनात्मक व जिम्मेदार तरीकों से किया जाएगा।
  • वित्त मंत्री ने राजकोषीय समेकन और जनकल्याणकारी प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सरकारी योजनाओं ने बुनियादी सेवाओं तक आम जनता की पहुंच को मजबूत किया है। इनमें खाद्य सुरक्षा, आवास, स्वच्छता, पेयजल और स्वास्थ्य बीमा योजनाएं शामिल हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, पिछले चार से पांच वर्षों में पूंजीगत व्यय ने अपने 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' के माध्यम से उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं, इसलिए यह सरकार की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वृद्धि को बनाए रखने के साथ-साथ राजकोषीय घाटे पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा, "हमें राजकोषीय रूप से विवेकपूर्ण होने की आवश्यकता है; अन्यथा यह लाभ की स्थिति नहीं होगी"। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजकोषीय अनुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी और खर्च रचनात्मक व जिम्मेदार तरीकों से किया जाएगा।

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

वित्त मंत्री ने राजकोषीय समेकन और जनकल्याणकारी प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सरकारी योजनाओं ने बुनियादी सेवाओं तक आम जनता की पहुंच को मजबूत किया है। इनमें खाद्य सुरक्षा, आवास, स्वच्छता, पेयजल और स्वास्थ्य बीमा योजनाएं शामिल हैं।

वित्तीय समावेशन के अगले चरण में सरकार ने तीन मुख्य क्षेत्रों- ऋण तक पहुंच, बीमा और पेंशन- को अपनी प्राथमिकता तय किया है।

उद्योग जगत की आवश्यकताओं और स्नातकों के कौशल के बीच के अंतर को समाप्त करने के लिए सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर विशेष ध्यान दे रही है। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार देश के प्रत्येक जिले में एआई प्रशिक्षण-सक्षम केंद्र स्थापित करना चाहती है। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को एआई-सक्षम नौकरियों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे युवाओं के रोजगार की संभावनाओं को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

वित्त मंत्री का यह संबोधन दर्शाता है कि सरकार आर्थिक विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय पर निर्भरता बनाए रखते हुए राजकोषीय अनुशासन से कोई समझौता नहीं करेगी। 2047 तक शत-प्रतिशत बीमा, हर जिले में एआई प्रशिक्षण और विकसित भारत के लिए बैंकिंग ढांचे का पुनर्गठन जैसे कदम भारत की दीर्घकालिक अर्थव्यवस्था की ठोस नींव तैयार करने का संकेत देते हैं।

रिपोर्टिंग स्रोत: Amar Ujala मूल रिपोर्ट देखें

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