India Launches Indigenous AI Models: भारत ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता को बढ़ाते हुए 'इंडिया एआई मिशन' के तहत तीन स्वदेशी एआई फाउंडेशन मॉडल लॉन्च किए हैं। ये एडवांस मॉडल्स 22 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं और
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में भारत अब पूरी ताकत के साथ उतर चुका है। देश की तकनीकी क्षमता को ग्लोबल स्तर पर ले जाने के लिए, भारत सरकार ने 'इंडिया एआई मिशन' (India AI Mission) के तहत तीन नए और बेहद एडवांस स्वदेशी एआई फाउंडेशन मॉडल लॉन्च किए हैं। इन मॉडल्स के नाम एका-1 (Eka-1), धीर-2बी (Dheer-2B) और धीर-5बी (Dheer-5B) हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस
- कृष्णन ने इन मॉडल्स की लॉन्चिंग को देश में एक मजबूत और सुरक्षित एआई इकोसिस्टम बनाने की दिशा में मील का पत्थर करार दिया है। आइए जानते हैं कि आम लोगों, सरकार और देश की सुरक्षा के लिए ये मॉडल्स क्यों इतने खास हैं। बिना इंटरनेट के भी करेंगे काम इन नए स्वदेशी एआई मॉडल्स की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें काम करने के लिए हमेशा इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ेगी। एस
- कृष्णन ने बताया कि धीर-2B और धीर-5B मॉडल्स को विशेष रूप से सुरक्षित (क्लोज्ड) कंप्यूटर नेटवर्क्स के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि रक्षा मंत्रालय, सरकारी एजेंसियों और अन्य संवेदनशील संस्थानों में बिना इंटरनेट के भी भारी-भरकम दस्तावेजों को एनालाइज किया जा सकेगा। इससे डेटा लीक होने का खतरा लगभग खत्म हो जाएगा और काम की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी। क्या है एका-1 की खासियत? सॉकेट लैब्स (Socket Labs) द्वारा तैयार किया गया एका-1 मॉडल एक बेहद पावरफुल टूल है। इसे 26.3 अरब पैरामीटर्स के बेस पर बनाया गया है और इसकी ट्रेनिंग करीब 7.5 लाख करोड़ टोकन के भारी-भरकम डेटासेट पर की गई है। यह सिर्फ अंग्रेजी तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के संविधान में दर्ज सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को बखूबी समझता है। यह मॉडल मैथ्स की जटिल कैलकुलेशन सुलझाने, कंप्यूटर कोडिंग करने और लॉजिकल रीजनिंग जैसे मुश्किल कामों को चुटकियों में निपटाने में माहिर है। डिफेंस से लेकर एजुकेशन तक होगा इस्तेमाल वहीं, जेन टेक आईक्यू (Zen Tech IQ) ने धीर (Dheer) सीरीज के दो एआई मॉडल्स लॉन्च किए हैं। ये मॉडल्स इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से बनाए गए हैं। सरकार की योजना इन तीनों स्वदेशी एआई टूल्स का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, डिफेंस ऑपरेशन्स को स्मार्ट बनाने, सरकारी सेवाओं को आम जनता तक तेजी से पहुंचाने और एजुकेशन सेक्टर को अपग्रेड करने में करने की है। इन स्वदेशी मॉडल्स की लॉन्चिंग से यह साफ हो गया है कि भारत अब एआई तकनीक के लिए केवल विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने खुद के एआई समाधान दुनिया के सामने पेश कर रहा है।
कृष्णन ने इन मॉडल्स की लॉन्चिंग को देश में एक मजबूत और सुरक्षित एआई इकोसिस्टम बनाने की दिशा में मील का पत्थर करार दिया है। आइए जानते हैं कि आम लोगों, सरकार और देश की सुरक्षा के लिए ये मॉडल्स क्यों इतने खास हैं। बिना इंटरनेट के भी करेंगे काम इन नए स्वदेशी एआई मॉडल्स की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें काम करने के लिए हमेशा इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ेगी। एस
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
कृष्णन ने बताया कि धीर-2B और धीर-5B मॉडल्स को विशेष रूप से सुरक्षित (क्लोज्ड) कंप्यूटर नेटवर्क्स के लिए डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि रक्षा मंत्रालय, सरकारी एजेंसियों और अन्य संवेदनशील संस्थानों में बिना इंटरनेट के भी भारी-भरकम दस्तावेजों को एनालाइज किया जा सकेगा। इससे डेटा लीक होने का खतरा लगभग खत्म हो जाएगा और काम की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी। क्या है एका-1 की खासियत? सॉकेट लैब्स (Socket Labs) द्वारा तैयार किया गया एका-1 मॉडल एक बेहद पावरफुल टूल है। इसे 26.3 अरब पैरामीटर्स के बेस पर बनाया गया है और इसकी ट्रेनिंग करीब 7.5 लाख करोड़ टोकन के भारी-भरकम डेटासेट पर की गई है। यह सिर्फ अंग्रेजी तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के संविधान में दर्ज सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को बखूबी समझता है। यह मॉडल मैथ्स की जटिल कैलकुलेशन सुलझाने, कंप्यूटर कोडिंग करने और लॉजिकल रीजनिंग जैसे मुश्किल कामों को चुटकियों में निपटाने में माहिर है। डिफेंस से लेकर एजुकेशन तक होगा इस्तेमाल वहीं, जेन टेक आईक्यू (Zen Tech IQ) ने धीर (Dheer) सीरीज के दो एआई मॉडल्स लॉन्च किए हैं। ये मॉडल्स इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से बनाए गए हैं। सरकार की योजना इन तीनों स्वदेशी एआई टूल्स का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, डिफेंस ऑपरेशन्स को स्मार्ट बनाने, सरकारी सेवाओं को आम जनता तक तेजी से पहुंचाने और एजुकेशन सेक्टर को अपग्रेड करने में करने की है। इन स्वदेशी मॉडल्स की लॉन्चिंग से यह साफ हो गया है कि भारत अब एआई तकनीक के लिए केवल विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने खुद के एआई समाधान दुनिया के सामने पेश कर रहा है।