'हवाई यात्रा मत कीजिए': 700% किराया बढ़ने के आरोप पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, तत्काल सुनवाई से भी किया इनकार
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- हवाई किराये में करीब 700 फीसदी बढ़ोतरी का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। वकील ने इसे जरूरी सेवा बताते हुए अनुच्छेद 14 के उल्लंघन का मुद्दा उठाया। अदालत पहले से ही विमान किराये में मनमानी बढ़ोतरी पर दूसरी याचिका सुन रही है। केंद्र नए नियम बना रहा है। क्या इन नियमों से हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों पर लगाम लग पाएगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं..
- हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए टिकटों की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराये में करीब 700 फीसदी बढ़ोतरी का आरोप लगाने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से मामले को तुरंत सुनने की मांग की थी। इस पर पीठ ने टिप्पणी की, ‘हवाई यात्रा मत कीजिए।’ वकील ने जवाब दिया कि हवाई यात्रा एक जरूरी सेवा है और किराये में इतनी बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। अनुच्छेद 14 कानून के सामने समानता के अधिकार से जुड़ा है।
- विमान किराये को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार क्या कदम उठा रही है?
हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए टिकटों की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराये में करीब 700 फीसदी बढ़ोतरी का आरोप लगाने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से मामले को तुरंत सुनने की मांग की थी। इस पर पीठ ने टिप्पणी की, ‘हवाई यात्रा मत कीजिए।’ वकील ने जवाब दिया कि हवाई यात्रा एक जरूरी सेवा है और किराये में इतनी बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। अनुच्छेद 14 कानून के सामने समानता के अधिकार से जुड़ा है।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
विमान किराये को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार क्या कदम उठा रही है?
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि भारतीय विमानन क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले नियम तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। ये नियम भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए जा रहे हैं। 17 अगस्त को केंद्र ने अदालत को बताया था कि नियम बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है। इसके बाद 16 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान सरकार ने जानकारी दी कि नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित किए जाने की संभावना है। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा था कि अगली सुनवाई पर प्रकाशित नियम उसके सामने रखे जाएं। इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होनी है।
यात्रियों के हितों की सुरक्षा के लिए याचिका में क्या मांग की गई है?
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
सामाजिक कार्यकर्ता एसएल लक्ष्मीनारायणन ने अपनी याचिका में विमानन क्षेत्र के लिए स्वतंत्र और प्रभावी नियामक व्यवस्था बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यात्रियों को टिकट की कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी और दूसरी सेवाओं के नाम पर लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क से सुरक्षा मिलनी चाहिए। याचिका में विमानन कंपनियों के किराये तय करने के तरीके में पारदर्शिता लाने की मांग भी की गई है। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। जनवरी में अदालत ने त्योहारों के दौरान किराये में भारी बढ़ोतरी पर सख्त टिप्पणी की थी। अब अदालत ने केंद्र से नए नियमों की जानकारी अगली सुनवाई में देने को कहा है।