विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय: वर्ष 2027 तक सभी राज्यों की राजधानी में स्थापित होंगे 'एफआरआरओ', अब हुए 20 कार्यालय
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय: वर्ष 2027 तक सभी राज्यों की राजधानी में स्थापित होंगे 'एफआरआरओ', अब हुए 20 कार्यालय
विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालयों (एफआरआरओ) के विस्तार का दोहरा फोकस विदेशियों की भारत में वैध यात्रा एवं प्रवास को सुविधाजनक बनाने तथा इमिग्रेशन कानूनों एवं सुरक्षा आवश्यकताओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने पर है। इमिग्रेशन एवं विदेशी अधिनियम, 2025, जिससे इमिग्रेशन एवं विदेशियों से संबंधित चार पूर्ववर्ती कानूनों को समेकित किया गया है, विदेशी नागरिकों के प्रवेश, ठहरने, आवागमन तथा प्रस्थान के विनियमन के लिए एक एकीकृत वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है। इस अधिनियम के अनुसार, मुख्यतः इमिग्रेशन संबंधी कार्य सम्पादित करने वाले इमिग्रेशन ब्यूरो को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में, अन्य के साथ-साथ, भारत सरकार द्वारा प्राधिकृत एफआरआरओ से सहायता प्राप्त होगी। विदेशियों के आगमन के बाद पंजीकरण विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय भारत आने वाले या भारत में निवास करने वाले विदेशी नागरिकों के वैध प्रवास को विनियमित करता है, ट्रैक करता है और सुगम बनाता है। यह पात्र श्रेणी के विदेशियों के आगमन के बाद पंजीकरण करता है और पंजीकरण पर पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी)/आवासीय परमिट जारी करता है। यह विदेशी के विवरणों में हुए परिवर्तनों, जैसे आवासीय पता, पासपोर्ट विवरण या देश के भीतर यात्रा को भी दर्ज करता है तथा संरक्षित एवं प्रतिबंधित क्षेत्रों की यात्रा के लिए अनुमति प्रदान करता है। निकास परमिट उन विदेशियों को जारी किए जाते हैं जिनके वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी है, जो निर्धारित अवधि से अधिक समय तक भारत में रहे हैं, या जिन्हें भारत छोड़ने से पूर्व औपचारिक मंजूरी की आवश्यकता होती है। कुल मिलाकर, एफआरआरओ भारतीय इमिग्रेशन कानूनों के पालन पर नज़र रखता है, ओवरस्टे और वीज़ा उल्लंघन के मामलों को देखता है, और ज़रूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई या सज़ा को कोऑर्डिनेट करता है।