पटाखों का शोर छीन सकता है सुनने की शक्ति: भारत में कानूनी सीमा 125 डेसीबल, बच्चों के लिए 120 भी खतरनाक- firecrackers noise can cause hearing loss legal limit India 125 decibels while 120 decibels dangerous children
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- पटाखों का शोर छीन सकता है सुनने की शक्ति: भारत में कानूनी सीमा 125 डेसीबल, बच्चों के लिए 120 भी खतरनाक- firecrackers noise can cause hearing loss legal limit India 125 decibels while 120 decibels dangerous children
नीरज कुमार सिंह के मुताबिक, पटाखों की आवाज चार मीटर पर मापी जाती है। दूरी आधी होने पर शोर छह डेसीबल बढ़ता है। इस हिसाब से 125 डेसीबल का पटाखा आधे मीटर पर 143 डेसीबल तक शोर कर सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अचानक तेज शोर की सीमा वयस्कों के लिए 140 और बच्चों के लिए 120 डेसीबल है। कान की महीन कोशिकाओं को हो सकता है स्थायी नुकसान पटाखों का धमाका कान का पर्दा फाड़ने के साथ अंदरूनी हिस्से की हेयर सेल्स को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ये कोशिकाएं दोबारा नहीं बनतीं, जिससे सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। ये भी पढ़ें: सांसों का संकट: दिल्ली में दिवाली से पहले हवा हुई और जहरीली, 24 इलाकों में एक्यूआई 400 पार; पंजाबी बाग में 453 दूरी बनाएं, कानों में रुई नहीं इयरप्लग लगाएं विशेषज्ञों के मुताबिक, पटाखे फोड़ते समय कम से कम चार-पांच मीटर दूर रहें। बच्चों को फोम इयरप्लग या इयरमफ पहनाएं। रुई शोर से पर्याप्त बचाव नहीं करती। पटाखों के बाद कान में घंटी बजने, दर्द या कम सुनाई देने पर ईएनटी विशेषज्ञ से मिलें। परेशानी 24-48 घंटे रहे तो जांच कराएं।