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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

'अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश से प्रतिष्ठा को ठेस नहीं', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: शनि, 7 नव॰ 2026, 03:18 pm
समाचार एजेंसी Dainik Jagran
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'अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश से प्रतिष्ठा को ठेस नहीं', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश न तो दंडात्मक होता है और न ही इससे कर्मचारी की प्रतिष्ठा पर आंच आती है, बल्कि यह जनहित और प्रशासनिक दक्षता पर आधारित होता है।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश न तो दंडात्मक होता है और न ही इससे कर्मचारी ...और पढ़ें
  • अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला (फोटो-पीटीआई)
  • अनिवार्य सेवानिवृत्ति दंडात्मक नहीं, प्रतिष्ठा पर आंच नहीं।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला (फोटो-पीटीआई)

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

अनिवार्य सेवानिवृत्ति दंडात्मक नहीं, प्रतिष्ठा पर आंच नहीं।

जनहित और प्रशासनिक दक्षता के लिए आवश्यक निर्णय।

छत्तीसगढ़ सरकार का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश देना न तो दंडात्मक होता है और न ही इससे उसकी प्रतिष्ठा पर आंच आती है। ऐसे आदेश से कर्मचारी के आचरण पर कोई आक्षेप नहीं लगता और न ही इसका मतलब यह है कि वह कदाचार का दोषी पाया गया है।

जस्टिस मनमोहन और श्री चंद्रशेखर की पीठ ने शुक्रवार को पांच कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के छत्तीसगढ़ सरकार के आदेश को बरकरार रखा। कहा कि ऐसा फैसला सक्षम अधिकारी के इस आकलन पर आधारित होता है कि संबंधित कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना अब जनहित में नहीं है।

पीठ ने कहा कि किसी अधिकारी की उपयोगिता समाप्त हो गई है या उसे सेवा में बनाए रखना प्रशासनिक दक्षता के लिए नुकसानदेह होगा, इसका अंतिम आकलन करना कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।

हालांकि, ऐसा आकलन महज अटकलों या मनमर्जी पर आधारित नहीं हो सकता। इसके लिए रिकार्ड में उपलब्ध ठोस और प्रासंगिक सामग्री का होना जरूरी है। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 12 अप्रैल, 2023 के आदेश को बरकरार रखा।

हाई कोर्ट ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने संबंधी राज्य सरकार के 2017 के परिपत्र को बरकरार रखा गया था।

रिपोर्टिंग स्रोत: Dainik Jagran मूल रिपोर्ट देखें

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