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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

'उन्होंने अपनी समझदारी से कदम उठाए', आपातकाल और इंदिरा गांधी को लेकर बोलीं सोनिया गांधी

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: शनि, 7 नव॰ 2026, 06:28 am
समाचार एजेंसी Dainik Jagran
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सोनिया गांधी ने इमरजेंसी की ज्यादतियों के लिए संजय गांधी को एकमात्र जिम्मेदार मानने से इनकार किया, कहा इंदिरा गांधी के वरिष्ठ सहयोगियों का भी दबाव था।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • सोनिया गांधी ने इमरजेंसी की ज्यादतियों के लिए संजय गांधी को एकमात्र जिम्मेदार मानने से इनकार किया, कहा इंदिरा गांधी के वरिष्ठ सहयोगियों का भी दबाव था।
  • कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी। (फाइल फोटो।)
  • सोनिया गांधी ने संजय गांधी को इमरजेंसी का एकमात्र दोषी नहीं माना।

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी। (फाइल फोटो।)

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

सोनिया गांधी ने संजय गांधी को इमरजेंसी का एकमात्र दोषी नहीं माना।

इंदिरा गांधी के वरिष्ठ सहयोगियों का भी दबाव था उस समय।

इंदिरा गांधी ने बाद में इमरजेंसी की ज्यादतियों पर खेद जताया।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सोनिया गांधी ने इमरजेंसी के दौरान हुई कथित ज्यादतियों के लिए पूरी जिम्मेदारी संजय गांधी पर मढ़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कुछ वरिष्ठ सहयोगियों की ओर से काफी दबाव था।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सोनिया गांधी की संस्मरण पुस्तक बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव 10 नवंबर को दुनिया भर में रिलीज हो रही है। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक सोनिया गांधी ने कहा, "ऐसा नहीं था कि सिर्फ संजय ही जिम्मेदार थे, हालांकि आम लोगों की नजर में उन्हें अक्सर आपातकाल (इमरजेंसी) का पर्याय माना जाता है। उस समय उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का काफी दबाव था और मुझे लगता है कि उनके आसपास राजीव जैसे बहुत कम लोग थे, जिनकी सोच अलग थी।"

उन्होंने आगे बताया कि उनके पति राजीव गांधी जो भी शिकायतें या प्रतिक्रियाएं सुनते थे, उन्हें अपनी मां तक पहुंचा देते थे। अंत में सोनिया ने कहा कि उनकी सास इंदिरा ने अपनी समझदारी से स्थिति को समझना शुरू कर दिया था और उसे सुधारने के लिए कदम उठाए।

उन्होंने अखबार से कहा, "मुझे लगता है कि आखिरकार मेरी सास ने अपनी समझदारी से स्थिति को समझना शुरू कर दिया था और उसे सुधारने के लिए कदम उठाए।" जब उनसे पूछा गया कि क्या आपातकाल को लोकतंत्र-विरोधी और तानाशाहीपूर्ण दौर मानना सही नहीं होगा तो कांग्रेस नेता ने इस बात से सहमति जताई कि लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया था।

सोनिया गांधी ने कहा, "आपातकाल के बाद ही मुझे इस बात की असल गंभीरता का पता चला कि क्या कुछ हो रहा था। हां, लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया था और बंदी प्रत्यक्षीकरण को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन यह सब संवैधानिक तरीके से किया गया था।"

रिपोर्टिंग स्रोत: Dainik Jagran मूल रिपोर्ट देखें

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