महाराष्ट्र: नाबालिग से दरिंदगी के दोषी को उम्रकैद, पोक्सो कोर्ट ने 65 साल के सिक्योरिटी गार्ड को सुनाई सजा thane dombivli pocso court life imprisonment uttam nikalje minor Molestation case
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- महाराष्ट्र: नाबालिग से दरिंदगी के दोषी को उम्रकैद, पोक्सो कोर्ट ने 65 साल के सिक्योरिटी गार्ड को सुनाई सजा thane dombivli pocso court life imprisonment uttam nikalje minor Molestation case
बिडवई ने शुक्रवार को कहा कि दोषी उत्तम निकलजे, जो एक रिहायशी सोसाइटी में चौकीदार का काम करता था, उसने कई साल तक पूरी तरह सोच-समझकर और शांत दिमाग से इस अपराध को अंजाम दिया। अदालत ने उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है और पीड़िता को, जो इस घटना से गहरे सदमे में है, आर्थिक मुआवजा देने का निर्देश दिया। क्या है आरोप? अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता डोंबिवली की उसी हाउसिंग सोसाइटी में रहती थी, जहां आरोपी चौकीदार था। 2017 की गर्मियों में उसने बच्ची के साथ यौन शोषण शुरू किया। आरोपी बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर बिल्डिंग की छत पर ले जाता था और वहां उसके साथ बार-बार यौन शोषण करता था। वह बच्ची को धमकी देता था कि अगर उसने किसी को इस बारे में बताया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। कैसे सामने आया मामला? यह मामला 20 फरवरी, 2020 को तब सामने आया, जब क्रांतिनगर में कचरा उठाने वाली टीम को एक डस्टबिन के पास काले कपड़े में लिपटा एक मृत नवजात शिशु मिला। इसके बाद मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान पता चला कि बच्ची को पेट में तेज दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद उसे एक क्लिनिक और डायग्नोस्टिक सेंटर ले जाया गया, जहां उसका गर्भपात हो गया। पीड़िता ने अपने माता-पिता को अपनी आपबीती बताई, जिसके बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस' (पॉक्सो) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने क्या कहा? अदालत ने कहा कि आरोपी ने कई साल तक पूरी तरह सोच-समझकर और शांत दिमाग से इस अपराध को अंजाम दिया। अदालत ने यह भी गौर किया कि विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहने के दौरान आरोपी गंभीर बीमारियों से पीड़ित था और उसे अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा था। अदालत ने कहा, 'यह मामला 'दुर्लभतम से दुर्लभ' (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) मामलों की श्रेणी में नहीं आता है; इसलिए इसमें मौत की सजा देना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में, आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा देना ही न्यायसंगत और सही होगा। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पॉक्सो अधिनियम की धारा छह के तहत आजीवन कारावास का अर्थ आरोपी के शेष प्राकृतिक जीवन भर के लिए कारावास होगा।'