प्रधान न्यायाधीश संजय के अग्रवाल और न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने आरोपित मोहम्मद रियाज, मोहम्मद गौस सहित सभी आरोपितों की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आरोप तय करने के चरण में अदालत मिनी ट्रायल नहीं चला सकती है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- प्रधान न्यायाधीश संजय के अग्रवाल और न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने आरोपित मोहम्मद रियाज, मोहम्मद गौस सहित सभी आरोपितों ...और पढ़ें
- कन्हैयालाल हत्याकांड के आरोपितों पर चलेगा आतंकवाद की धाराओं में मुकदमा
- उदयपुर के दुकान में घुसकर कन्हैयालाल की धारदार हथियार से काट दी गई थी गर्दन
कन्हैयालाल हत्याकांड के आरोपितों पर चलेगा आतंकवाद की धाराओं में मुकदमा
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
उदयपुर के दुकान में घुसकर कन्हैयालाल की धारदार हथियार से काट दी गई थी गर्दन
राजस्थान हाई कोर्ट ने अधीनस्थ अदालत के आदेश में दखल देने से किया साफ इनकार
जागरण संवाददाता, जयपुर। उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड के आठ आरोपितों पर आतंकवाद की धाराओं में ही मुकदमा चलेगा। राजस्थान हाई कोर्ट ने आरोपितों की याचिकाओं को खारिज करते हुए अधीनस्थ अदालत के चार्ज फ्रेम करने के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
प्रधान न्यायाधीश संजय के अग्रवाल और न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने आरोपित मोहम्मद रियाज, मोहम्मद गौस सहित सभी आरोपितों की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि आरोप तय करने के चरण में अदालत मिनी ट्रायल नहीं चला सकती है।
खंडपीठ ने कहा कि इस स्टेज पर यह देखना होता है कि क्या अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूतों से आरोपितों के खिलाफ प्रथम दृष्टया केस बनता है या नहीं, यदि आरोपितों के खिलाफ गंभीर संदेह मौजूद है तो न्यायालय का आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करना पूरी तरह सही है।
यह पूरा मामला कथित तौर पर नूपुर शर्मा की ओर से की गई टिप्पणियों को कन्हैयालाल की ओर से इंटरनेट मीडिया पर शेयर करने के बाद पैदा हुए विवाद से जुड़ा है। विवाद के बाद आरोप है कि मोहम्मद गौस और रियाज ने दुकान में घुसकर कन्हैयालाल की धारदार हथियार से गर्दन काट दी थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि मामले में मौजूद वीडियो, धमकियां और आरोपितों के बीच संबंध की जांच निचली अदालत के दौरान ही संभव है। ऐसे में साफ है कि सभी आरोपितों पर आतंकवाद की धाराओं में ही मुकदमा चलेगा।
उल्लेखनीय है कि एनआइए की विशेष अदालत में आरोपितों के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967, आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता के तहत आरोप तय किए गए थे।