नरक चतुर्दशी के दिन विशेष विधि से स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और उसे नरक की यातनाओं से बचने का पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं अभ्यंग स्नान क्या है और छोटी दिवाली पर इसे करने की परंपरा क्यों प्रचलित है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- Abhyang Snan 2026 Vidhi: नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। दीपावली से पहले आने वाला यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। पांच दिवसीय दीपोत्सव में इसका विशेष स्थान है। इस दिन दीपदान और पूजा-पाठ के साथ सुबह सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की परंपरा भी निभाई जाती है। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन विशेष विधि से स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और उसे नरक की यातनाओं से बचने का पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं अभ्यंग स्नान क्या है और छोटी दिवाली पर इसे करने की परंपरा क्यों प्रचलित है।
- अभ्यंग स्नान सामान्य स्नान से अलग एक पारंपरिक प्रक्रिया है। इसमें नहाने से पहले शरीर पर तेल लगाकर मालिश की जाती है। इसके लिए तिल का तेल, सरसों का तेल या अन्य उपयुक्त तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद शरीर पर उबटन लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाता है और फिर स्नान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे तन और मन की शुद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर यह स्नान करने से आरोग्य, सौंदर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
- नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान क्यों किया जाता है?
अभ्यंग स्नान सामान्य स्नान से अलग एक पारंपरिक प्रक्रिया है। इसमें नहाने से पहले शरीर पर तेल लगाकर मालिश की जाती है। इसके लिए तिल का तेल, सरसों का तेल या अन्य उपयुक्त तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद शरीर पर उबटन लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाता है और फिर स्नान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे तन और मन की शुद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर यह स्नान करने से आरोग्य, सौंदर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान क्यों किया जाता है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरकासुर नामक असुर ने अपने अत्याचारों से देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान कर रखा था। उसने देवराज इंद्र को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। उसके आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध किया। इस युद्ध में सत्यभामा ने नरकासुर का वध किया और देवताओं को उसके अत्याचारों से छुटकारा मिला।
एक प्रचलित धार्मिक मान्यता के मुताबिक, नरकासुर के वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अपने शरीर की अशुद्धियां दूर करने के लिए तेल और उबटन से स्नान किया था। इसी प्रसंग को नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।