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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

'स्टारलिंक ने सबसे अंत में पूरी की सुरक्षा शर्तें', केंद्र सरकार ने सैटकॉम लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर साफ किया रुख

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: शुक्र, 6 नव॰ 2026, 10:47 am
समाचार एजेंसी Dainik Jagran
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भारत सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में सभी कंपनियों का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया है कि ग्राहक ही अंतिम निर्णय लेंगे कि उन्हें कौन सी सेवा पसंद है।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • भारत सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में सभी कंपनियों का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया है कि ग्राहक ही अंतिम निर्णय लेंगे कि उन्हें कौन सी सेवा पसंद है।
  • ग्राहक तय करेंगे कौन सी सैटेलाइट सेवा उन्हें पसंद है।
  • जियो, वनवेब, स्टारलिंक के पास सैटकॉम लाइसेंस मौजूद हैं।

ग्राहक तय करेंगे कौन सी सैटेलाइट सेवा उन्हें पसंद है।

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

जियो, वनवेब, स्टारलिंक के पास सैटकॉम लाइसेंस मौजूद हैं।

सेवा शुरू होने से पहले स्पेक्ट्रम, सुरक्षा शर्तें बाकी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर को लेकर केंद्र सरकार ने अपना रुख साफ किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में इस सेक्टर की सभी कंपनियों का स्वागत है और आखिरी में कस्टमर ही यह तय करेंगे कि उन्हें कौन सी सेवा पसंद है।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

इस मामले में न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सरकारी सूत्रों ने कहा कि इस क्षेत्र में ग्राहक ही राजा है और उपभोक्ता अपने सुविधा को देखते हुए कीमत, वैल्यू और सर्विस की गुणवत्ता के आधार पर अपनी पसंद की कंपनी चुनेंगे।

बता दें कि वर्तमान समय भारत में जियो, वनवेब और स्टारलिंक, इन तीनों कंपनियों के पास सैटकॉम लाइसेंस मौजूद हैं। ऐसे में सरकार ने बताया कि पूरी लाइसेंस प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी रही है। इसके अलावा सरकार ने यह भी बताया कि एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक इस लाइसेंस के लिए आवेदन करने और उसे पाने वाली आखिरी कंपनी थी।

भारत सरकार ने साफ किया है कि मामले में तीनों ही लाइसेंसधारी कंपनियों को अपनी क्षमता दिखाने और तय सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए कहा गया था। इस मामले में वनवेब ने सबसे पहले अपने कंप्लायंस डॉक्यूमेंट्स जमा किए, उसके बाद जियो ने और स्टारलिंक ने इसमें सबसे आखिर में प्रक्रिया पूरी की।

गौरतलब है कि अभी सेवा शुरू होने में दो और कदम बाकी है। इस बात को ऐसे समझिए कि इस मामले में सरकार को यह तय करना है कि स्पेक्ट्रम कैसे और किस कीमत पर मिलेगा। दूसरा कदम  तीनों कंपनियों द्वारा सभी सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरी तरह से पूरा किया जाना जरूरी है। अब ऐसे में जैसे ही ये शर्तें पूरी हो जाएंगी, देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं बड़े पैमाने पर शुरू हो सकेंगी और इससे पूरे सेक्टर को फायदा मिलेगा।

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रिपोर्टिंग स्रोत: Dainik Jagran मूल रिपोर्ट देखें

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