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भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

'लंबी कानूनी लड़ाई से खत्म नहीं होता मकान मालिक का हक', 40 साल पुराने विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने किरायेदार को मकान खाली करने का दिया आदेश

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: गुरु, 5 नव॰ 2026, 03:06 pm
समाचार एजेंसी Dainik Jagran
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'लंबी कानूनी लड़ाई से खत्म नहीं होता मकान मालिक का हक', 40 साल पुराने विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने किरायेदार को मकान खाली करने का दिया आदेश
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सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि दशकों लंबी कानूनी लड़ाई से मकान मालिक की वास्तविक जरूरत खत्म नहीं होती। कोर्ट ने पीलीभीत के 40 साल पुराने विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर किरायेदार को संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि दशकों लंबी कानूनी लड़ाई से मकान मालिक की वास्तविक जरूरत खत्म ...और पढ़ें
  • लंबी कानूनी लड़ाई से मकान मालिक की जरूरत खत्म नहीं होती-सुप्रीम कोर्ट
  • लंबी कानूनी लड़ाई से मकान मालिक की जरूरत खत्म नहीं होती।

लंबी कानूनी लड़ाई से मकान मालिक की जरूरत खत्म नहीं होती-सुप्रीम कोर्ट

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

लंबी कानूनी लड़ाई से मकान मालिक की जरूरत खत्म नहीं होती।

40 साल पुराने पीलीभीत विवाद में हाईकोर्ट का फैसला रद्द।

किरायेदार को 30 दिनों के भीतर संपत्ति खाली करने का निर्देश।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी किरायेदार के खिलाफ दशकों तक चलने वाली कानूनी लड़ाई का यह मतलब नहीं है कि मकान मालिक की अपनी संपत्ति पाने की वास्तविक और जायज जरूरत खत्म हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से जुड़े करीब 40 साल पुराने मकान मालिक किरायेदार विवाद का निपटारा करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश रद्द कर दिया और किरायेदार को संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया।

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की पीठ ने निचली अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए बेदखली के आदेश को पूरी तरह बहाल कर दिया।

पीठ ने कहा, 'समय बीतने के साथ शुरुआती तकनीकी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं और अदालतों में लंबे समय तक खिंचने वाला मुकदमा मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता को समाप्त नहीं कर सकता।'

मकान मालिक ने जुलाई 1984 में इस संपत्ति का मालिकाना हक हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश शहरी भवन अधिनियम 1972 के तहत किरायेदार को नोटिस भेजा और तीन साल के अंदर जगह खाली करने के लिए कहा। 1998 में तय अथॉरिटी के सामने भरोसा दिलाने के बावजूद किरायेदार ने जगह खाली नहीं की।

रिपोर्टिंग स्रोत: Dainik Jagran मूल रिपोर्ट देखें

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