तमिलनाडु के पलानी स्थित अरुलमिगु दंडायुथपाणि स्वामी मंदिर में भक्तों ने दिल खोलकर दान किया है। मंदिर को 2.26 करोड़ नकद, 286 ग्राम सोना, 10.752 किलोग्राम चांदी और विदेशी मुद्रा सहित भारी चढ़ावा मिला।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- तमिलनाडु के पलानी स्थित अरुलमिगु दंडायुथपाणि स्वामी मंदिर में भक्तों ने दिल खोलकर दान किया है। मंदिर को 2.26 करोड़ ...और पढ़ें
- मंदिर में चढ़ावे की गिनती करते कर्मचारी (फाइल)।
- पलानी मंदिर को 2.26 करोड़ रुपये नकद चढ़ावा मिला।
मंदिर में चढ़ावे की गिनती करते कर्मचारी (फाइल)।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
पलानी मंदिर को 2.26 करोड़ रुपये नकद चढ़ावा मिला।
भक्तों ने 286 ग्राम सोना और 10.752 किलो चांदी दान की।
मंदिर में विदेशी मुद्रा नोट भी बड़ी संख्या में मिले।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु के पलानी स्थित अरुलमिगु दंडायुथपाणि स्वामी मंदिर में लोग दिल खोल कर चढ़ावा चढ़ा रहे हैं। मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान दो करोड़ से ज्यादा कैश, सोना, चांदी के अलावा विदेशी मुद्रा भी मिले है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार भक्तों ने मंदिर में 2.26 करोड़ नकद, 286 ग्राम सोना, 10.752 किलोग्राम चांदी और 393 विदेशी मुद्रा नोट चढ़ाए हैं। मंदिर प्रशासन ने बताया कि भक्तों द्वारा दान किए गए इस चढ़ावे ने एक बार फिर मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को दिखाया है।
तमिलनाडु का अरुलमिगु दंडायुथपाणि मंदिर दक्षिण भारत के लोगों में गहरी आस्था का केंद्र है। यहां पर सालों भर भक्त भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए आते रहते हैं। इस मंदिर को पलानी मुरुगन मंदिर भी कहा जाता है। राज्य के डिंडीगुल जिले के पलानी शहर में शिवगिरि पहाड़ी पर बना ये प्राचीन मंदिर काफी भव्य है। इस मंदिर की भव्यता से यहां आने वाले लोग अक्सर प्रभावित हो जाते हैं। ये देश के काफी धनी मंदिरों में एक गिना जाता है। यहां पर भक्त दिल खोल कर दान करते हैं।
ये मंदिर की शोभा इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि ये पलानी शहर में शिवगिरि पहाड़ी पर बना है। इससे इस मंदिर का नजारा काफी मोहक और मनोरम हो जाता है। प्रसिद्ध हिंदू मंदिर में लोगों की गहरी आस्था है। ये भगवान कार्तिकेय (भगवान मुरुगन) के छह पवित्र निवासों ('आरुपाड़ा वीदु') में से तीसरा और सबसे अहम स्थान माना जाता है।
यहां का पलानी पंचामृतम (केला, गुड़, घी, शहद और इलायची से बना प्रसाद) बहुत प्रसिद्ध है, जिसे भौगोलिक संकेत (GI Tag) भी मिला है। जनवरी के महीने में यहां 'थाईपुसम' का भव्य उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु यहां कांवड़ लेकर दर्शन करने आते हैं।