LIVE बुध, 4 नव॰ 2026
ई-पेपर
सत्यमेव जयते • The Voice of Independent Journalism • 24x7 Digital Media
TAAZAWIRE
ताज़ा वायर • राष्ट्रीय डिजिटल दैनिक
बुधवार, 4 नवंबर 2026 • विक्रम संवत 2083 | राष्ट्रीय दैनिक
ताज़ा हलचल:
मार्केट लाइव:
सेंसेक्स (BSE) 77,301.4 +1608.60 (+2.13%)
निफ्टी 50 23,960.6 +519.80 (+2.22%)
सोना (24K) ₹78,850 +240
चांदी (1kg) ₹93,400/kg +450
पेट्रोल (दिल्ली) ₹94.72/L
डीजल ₹87.62/L
USD/INR ₹94.63
विशेष पेशकश (SPONSORED) SPONSORED
Dukan Book Digital Khata - Google Play Store
breaking तथ्य सत्यापित (Fact Checked) 2 मिनट का समय 0 बार पढ़ा गया
भाषा: हिंदी (मूल समाचार)

बिहार अपराध और क्राइम के बहाने: क्या अपराध खत्म हो गया है या परिभाषा बदलने में जुटे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी?

विशेष संवाददाता | ब्यूरो | नई दिल्ली ब्यूरो
प्रकाशित: मंगल, 3 नव॰ 2026, 10:41 pm
समाचार एजेंसी Amar Ujala
यह ख़बर सुनें (AI ऑडियो) ऑडियो

प्ले बटन दबाकर पूरी ख़बर आवाज़ में सुनें

बिहार अपराध और क्राइम के बहाने: क्या अपराध खत्म हो गया है या परिभाषा बदलने में जुटे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी?
इस ख़बर को शेयर करें: दोस्तों के साथ साझा करें
WhatsApp Telegram X (Twitter)
विशेष पेशकश (SPONSORED) SPONSORED
Dukan Book Digital Khata - Google Play Store

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का दावा है कि राज्य में अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो चुका है। क्राइम हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं! मुख्यमंत्री के इस बयान ने कानून-व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

प्रमुख बातें (Key Highlights):

  • Samrat Choudhary Statement: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 3 नवंबर 2026 को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में अपराध को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा छेड़ दी। उन्होंने कहा-
  • हमारे यहां कोई अपराध नहीं है। अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो चुका है। क्राइम हो सकते हैं, लेकिन अपराध नहीं। कोई अपराधी नहीं है।" मुख्यमंत्री का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। विपक्ष ने इसे लेकर सवाल उठाए और बिहार की कानून-व्यवस्था पर तंज कसा।
  • राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री के बयान पर कटाक्ष करते हुए सवाल किया कि मंच पर बैठे आईएएस और आईपीएस अधिकारी उनके इस तर्क को किस रूप में ले रहे होंगे। यहां सवाल केवल भाषा या शब्दों के चयन का नहीं है। अंग्रेजी का Crime और हिंदी का अपराध एक ही अर्थ रखते हैं। दोनों के बीच अंतर बताकर अपराध के अस्तित्व को नकारने का क्या औचित्य है? हो सकता है मुख्यमंत्री यह बताना चाह रहे हों कि उनकी सरकार ने अपराध पर प्रभावी नियंत्रण कर लिया है। यदि ऐसा है तो उन्हें अपराध के आंकड़ों और तुलनात्मक रिकॉर्ड के साथ अपनी बात रखनी चाहिए थी। .ads-row{display:flex;gap:10px;flex-wrap:wrap;}

हमारे यहां कोई अपराध नहीं है। अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो चुका है। क्राइम हो सकते हैं, लेकिन अपराध नहीं। कोई अपराधी नहीं है।" मुख्यमंत्री का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। विपक्ष ने इसे लेकर सवाल उठाए और बिहार की कानून-व्यवस्था पर तंज कसा।

मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति

राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री के बयान पर कटाक्ष करते हुए सवाल किया कि मंच पर बैठे आईएएस और आईपीएस अधिकारी उनके इस तर्क को किस रूप में ले रहे होंगे। यहां सवाल केवल भाषा या शब्दों के चयन का नहीं है। अंग्रेजी का Crime और हिंदी का अपराध एक ही अर्थ रखते हैं। दोनों के बीच अंतर बताकर अपराध के अस्तित्व को नकारने का क्या औचित्य है? हो सकता है मुख्यमंत्री यह बताना चाह रहे हों कि उनकी सरकार ने अपराध पर प्रभावी नियंत्रण कर लिया है। यदि ऐसा है तो उन्हें अपराध के आंकड़ों और तुलनात्मक रिकॉर्ड के साथ अपनी बात रखनी चाहिए थी। .ads-row{display:flex;gap:10px;flex-wrap:wrap;}

बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति का मूल्यांकन राजनीतिक भाषणों या विपक्ष के आरोपों से नहीं होना चाहिए। इसके लिए सरकारी आंकड़े, पुलिस रिकॉर्ड, अदालतों के फैसले और आम नागरिकों के अनुभव सभी महत्वपूर्ण हैं।

सम्राट चौधरी सरकार के पास यह बताने का अवसर है कि उसने अपराध नियंत्रण के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं और उनका क्या परिणाम निकला है। अगर हत्या और डकैती के मामलों में वास्तव में कमी आई है तो यह सरकार की उपलब्धि है। लेकिन जहां पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, वहां निष्पक्ष जांच भी सरकार की ही जिम्मेदारी है।

मुख्य प्रभाव और आगामी कदम

मुख्यमंत्री को यह भी समझना होगा कि अपराधियों के खिलाफ सख्ती और पुलिस की जवाबदेही एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। कानून का शासन तभी मजबूत होता है जब अपराधी को सजा मिले और निर्दोष के अधिकारों की भी रक्षा हो।क्राइम और अपराध में अंतर बताने से अपराध खत्म नहीं होते। एफिडेविट में उम्र का विवाद हो या पुलिस एनकाउंटर पर उठते सवाल, हर मामले में जवाबदेही जरूरी है। बिहार की जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसके राज्य में कानून का राज कितना मजबूत हुआ है।

आखिर मुख्यमंत्री से सवाल यही है- बिहार में अपराध खत्म हुआ है या सिर्फ अपराध को देखने और उसकी व्याख्या करने का तरीका बदल गया है?

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

रिपोर्टिंग स्रोत: Amar Ujala मूल रिपोर्ट देखें

💬 इस ख़बर पर आपकी क्या राय है?

अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करें (1-क्लिक वोट)

यह जानकारी कैसी लगी? अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें:

इस ख़बर को शेयर करें: दोस्तों के साथ साझा करें
WhatsApp Telegram X (Twitter)

📢 ऐसी ही हर बड़ी ताज़ा ख़बर सीधे टेलीग्राम पर पाएं

बिना किसी देरी के सबसे पहले अपडेट्स के लिए हमारे ग्रुप से जुड़ें।

चैनल जॉइन करें
TaazaWire App Icon

TaazaWire App FREE

1-क्लिक में होमस्क्रीन पर जोड़ें और सबसे तेज़ ख़बरें पायें