भारत की बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती दे रही है। पिछले 15 वर्षों में कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत हुई है।
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- भारत की बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती दे रही है। पिछले 15 वर्षों ...और पढ़ें
- चार गुना गढ़ी भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता- अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी
- अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट में लगाया गया अनुमान
चार गुना गढ़ी भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता- अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट में लगाया गया अनुमान
2030 तक 530 गीगावाट हो सकती है भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता
पीटीआई, नई दिल्ली। भारत की बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती दे रही है। पिछले 15 वर्षों में कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत हुई है।
मुख्य प्रभाव और आगामी कदम
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आइईए) की नई रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दशक में भारत की नवीकरणीय बिजली क्षमता लगभग चार गुना हो गई है। 2026 में यह 300 गीगावाट के पार पहुंच गई, जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता करीब 530 गीगावाट हो सकती है। हालांकि इसके लिए सहायक बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश करना होगा।
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 के दौरान जारी ‘भारत नवीकरणीय ऊर्जा बाजार रिपोर्ट 2026’ के अनुसार भारत ने निर्धारित समय से पांच साल पहले 2025 में ही बिजली उत्पादन क्षमता में 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन का लक्ष्य हासिल कर लिया।
नवीकरणीय बिजली उत्पादन से 2011 से 2025 के बीच कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब अमेरिकी डालर से अधिक की बचत हुई।
आइईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा, वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने के समय भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़े लाभ दे रहा है।