दिशा सालियान केस: कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिका दर्ज, क्या फिर खुलेगा छह साल पुराना मामला?
प्रमुख बातें (Key Highlights):
- दिशा सालियान की मौत के छह साल बाद मामले में फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सीबीआई अदालत ने जांच को अपनी निगरानी में कराने की मांग वाली याचिका दर्ज कर 18 नवंबर को सुनवाई तय की है। वकील ने तीन अहम गवाहों के बयान दर्ज नहीं होने और कुछ प्रमुख लोगों से जुड़े रिकॉर्ड का दावा किया है। आखिर अदालत की निगरानी में जांच की मांग क्यों उठी और अब क्या होगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं..
- दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में जांच को लेकर एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग वाली याचिका केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत में दर्ज कर ली गई है। इस पर 18 नवंबर को सुनवाई होगी। याचिका दाखिल करने वाले वकील नीलेश ओझा का कहना है कि घटना के छह साल बीत जाने के बाद भी कुछ अहम गवाहों के बयान तय समय के भीतर दर्ज नहीं किए गए। इसी वजह से उन्होंने अदालत से जांच की निगरानी करने की मांग की है। इस मामले में अब अदालत की सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।
- याचिका में अदालत से क्या मांग की गई है और गवाहों के बयान क्यों हैं अहम?
दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में जांच को लेकर एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग वाली याचिका केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत में दर्ज कर ली गई है। इस पर 18 नवंबर को सुनवाई होगी। याचिका दाखिल करने वाले वकील नीलेश ओझा का कहना है कि घटना के छह साल बीत जाने के बाद भी कुछ अहम गवाहों के बयान तय समय के भीतर दर्ज नहीं किए गए। इसी वजह से उन्होंने अदालत से जांच की निगरानी करने की मांग की है। इस मामले में अब अदालत की सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।
मामले का पूरा विवरण और ताज़ा स्थिति
याचिका में अदालत से क्या मांग की गई है और गवाहों के बयान क्यों हैं अहम?
वकील नीलेश ओझा के मुताबिक, इस मामले में तीन अहम गवाहों के बयान घटना के बाद निर्धारित 60 दिनों की अवधि के भीतर दर्ज नहीं किए गए। उन्होंने इसे अस्वीकार्य बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया। ओझा का कहना है कि ऐसे हालात में पीड़ित पक्ष अदालत में आवेदन देकर जांच को उसकी निगरानी में कराने की मांग कर सकता है। इसी आधार पर उन्होंने सीबीआई अदालत में याचिका दाखिल की। ओझा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पेश किए जाने के बाद अदालत ने आवेदन स्वीकार कर लिया और सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय कर दी। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों और दावों पर अदालत का फैसला आना अभी बाकी है।